मनरेगा भुगतान में बड़ा खेल? शिकायत के 14 दिन बाद भी चुप जिला प्रशासन, सहसपुर लोहारा में भुगतान अनियमितता पर उठे गंभीर सवाल,पढ़े पुरा समाचार…?
कवर्धा / सहसपुर लोहारा, 03 जुलाई 2026। कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, पुराने लंबित हितग्राही कार्यों की अनदेखी की गई और चुनिंदा कार्यों को प्राथमिकता देकर भुगतान किया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संबंध में 18 जून 2026 को जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपे जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की जांच अथवा कार्रवाई सामने नहीं आई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा में मनरेगा भुगतान प्रक्रिया नियमों और प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित नहीं की जा रही है। शिकायत में प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी एवं सहायक प्रोग्रामर दिलीप साहू पर भुगतान प्रक्रिया में मनमाने हस्तक्षेप और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार पात्र हितग्राहियों के कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित रखा गया, जबकि कुछ अन्य कार्यों को प्राथमिकता देकर राशि जारी कर दी गई।
2025 के हितग्राही कार्य अब भी भुगतान की प्रतीक्षा में
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2025 में पूर्ण हुए अनेक हितग्राही मूलक कार्य, जिनमें कुआं निर्माण, पशु शेड निर्माण तथा अन्य व्यक्तिगत लाभकारी कार्य शामिल हैं, आज भी भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को सीधा लाभ पहुंचाना था। आरोप है कि इन लंबित कार्यों की अनदेखी कर वर्ष 2026 में पूर्ण हुए कुछ निर्माण कार्यों का भुगतान पहले कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों ने शासन की योजना के तहत कार्य पूरे कर लिए, वे महीनों से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। समय पर राशि नहीं मिलने से कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
03 जून को 22 कार्यों का भुगतान, चयन पर उठे सवाल
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 03 जून 2026 को केवल 22 कार्यों के एफटीओ (Fund Transfer Order) जारी किए गए। इन कार्यों में मुख्य रूप से चेक डैम, स्टॉप डैम और रिटेनिंग वॉल जैसे निर्माण कार्य शामिल बताए गए हैं।
आरोप है कि भुगतान के लिए इन्हीं कार्यों को प्राथमिकता दी गई, जबकि लंबे समय से लंबित हितग्राही मूलक कार्यों को जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि भुगतान सूची तैयार करने के आधार और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मनरेगा की मूल भावना पर सवाल
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ कार्य पूर्ण होने पर समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान में भेदभाव या अनावश्यक विलंब होता है तो इससे योजना की मूल भावना प्रभावित होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा की मजदूरी और हितग्राही योजनाओं की राशि उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में भुगतान में देरी या चयनात्मक प्राथमिकता गरीब परिवारों को सीधे आर्थिक कठिनाई में डालती है।
14 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न
सबसे गंभीर सवाल शिकायत के बाद प्रशासन की चुप्पी को लेकर उठ रहे हैं। शिकायत 18 जून को जिला पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत की गई थी, लेकिन 14 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो जांच समिति गठित होने की जानकारी सामने आई है और न ही किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।
सामान्यतः ऐसी शिकायतों में प्रारंभिक जांच, अभिलेखों का परीक्षण तथा संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। लेकिन अब तक किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई सार्वजनिक नहीं होने से स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ग्रामीणों के बीच बढ़ रही नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत निराधार होती तो प्रशासन तत्काल जांच कर स्थिति स्पष्ट कर सकता था। लेकिन कार्रवाई में लगातार हो रही देरी से लोगों के मन में संदेह उत्पन्न हो रहा है।
ग्रामीणों का सवाल है कि—
- वर्ष 2025 के लंबित हितग्राही कार्यों का भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ?
- भुगतान सूची तैयार करने के लिए किन मानकों का पालन किया गया?
- किन परिस्थितियों में वर्ष 2026 के कार्यों को प्राथमिकता दी गई?
- शिकायत मिलने के बाद अब तक जांच क्यों प्रारंभ नहीं हुई?
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा सभी लंबित हितग्राही कार्यों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या फिर यह मामला केवल फाइलों तक सीमित रह जाता है।


