स्वामी आत्मानंद स्कूल सहसपुर लोहारा में बदहाली, किताबें नदारद, पेयजल संकट और जर्जर भवन से छात्रों की सुरक्षा पर खतरा,पढ़े पुरा समाचार…?

सहसपुर लोहारा, 30 जून। प्रदेश सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 16 जून से कर दी, लेकिन स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिंदी माध्यम विद्यालय, सहसपुर लोहारा में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सत्र शुरू हुए 15 दिन बीत जाने के बावजूद कक्षा 1 से 12वीं तक के अनेक विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है।

स्कूल संचालित भवन की स्थिति ☝️☝️

विद्यालय में केवल पुस्तकों की कमी ही नहीं, बल्कि पेयजल, स्वच्छता और भवन की सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। गर्मी और उमस के बीच विद्यार्थियों को पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि विद्यालय में पानी की व्यवस्था नगर पंचायत के टैंकरों के माध्यम से करनी पड़ रही है।

जर्जर भवन बना हादसे का इंतजार

विद्यालय की कई कक्षाओं की छत का प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। वहीं कई दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्र-छात्राएं इन्हीं कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

शौचालयों की बदहाल स्थिति

विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए बनाए गए शौचालय भी अपनी बदहाली बयां कर रहे हैं। कई शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं, वॉश बेसिन क्षतिग्रस्त हैं और पानी की आपूर्ति नहीं होने से उनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। नालियों में गंदगी जमा होने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

शिक्षा के मंदिर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सहसपुर लोहारा के इस स्कूल की स्थिति उन दावों की हकीकत बयां कर रही है। एक ओर बच्चे बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर भवन और पेयजल संकट उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

अभिभावकों में बढ़ रही चिंता

अभिभावकों का कहना है कि सत्र शुरू होने के बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही विद्यालय की जर्जर स्थिति को देखते हुए वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही आवश्यक सुधार कार्य नहीं किए गए तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि विद्यालय में तत्काल पाठ्यपुस्तकों का वितरण कराया जाए, पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए, शौचालयों की मरम्मत कर स्वच्छता सुनिश्चित की जाए तथा जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत या आवश्यकतानुसार नए भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

मुख्य समस्याएं एक नजर में

* कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलीं।
* विद्यालय में पेयजल का गंभीर संकट, नगर पंचायत के टैंकर से हो रही पानी की आपूर्ति।
* कक्षाओं की छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है।
* कई दीवारों में दरारें, भवन की सुरक्षा पर सवाल।
* शौचालयों के दरवाजे और वॉश बेसिन टूटे, पानी की व्यवस्था नहीं।
* नालियों में गंदगी, स्वच्छता व्यवस्था बदहाल।
* विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित|

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