कबीरधाम में 38,428 क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिलने पर उठे सवाल, खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था घेरे में- युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी…

कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी के बाद स्टॉक मिलान के दौरान 38 हजार 428 क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिलने का मामला सामने आया है। अंतिम मिलान के बाद भी जिले की कई सेवा सहकारी समितियों में रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक उपलब्ध स्टॉक के बीच अंतर सामने आने की बात कही जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने के बाद अब खाद्य विभाग की निगरानी, सत्यापन और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।


मामले में सबसे अधिक चर्चा उन सेवा सहकारी समितियों को लेकर है, जहां 3 प्रतिशत से अधिक धान की कमी (शॉर्टेज) सामने आई है। आरोप है कि निर्धारित सीमा से अधिक कमी पाए जाने के बावजूद संबंधित समितियों के खिलाफ अपेक्षित कठोर कार्रवाई नहीं की गई। इससे धान खरीदी के दौरान स्टॉक की निगरानी करने वाले अधिकारियों और विभागीय व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नोडल और मॉनिटरिंग अधिकारियों की निगरानी पर सवाल

धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक उपार्जन केंद्र में नोडल अधिकारी और मॉनिटरिंग अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाती है। खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण, स्टॉक के सत्यापन और समय-समय पर भौतिक मिलान की व्यवस्था भी की जाती है।

ऐसे में अंतिम मिलान के बाद यदि हजारों क्विंटल धान का अंतर सामने आता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि खरीदी अवधि के दौरान स्टॉक की नियमित निगरानी और भौतिक सत्यापन किस स्तर पर किया गया। 38,428 क्विंटल धान की कमी को लेकर अब जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।

कमीशन राशि से समायोजन को लेकर भी सवाल

मामले में सेवा सहकारी समितियों को मिलने वाली कमीशन राशि के समायोजन के जरिए धान की कमी की भरपाई किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि यदि कमीशन राशि को समायोजित कर धान की कमी का मामला निपटाया जाता है, तो इससे वास्तविक जिम्मेदारी तय होने के बजाय संबंधित समिति के प्रबंधकों या जिम्मेदार कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि 38 हजार 428 क्विंटल धान की कमी आखिर किसकी जिम्मेदारी है? आर्थिक नुकसान की भरपाई के साथ-साथ यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई कब होगी?

कबीरधाम में धान गड़बड़ी के सबसे ज्यादा FIR होने का दावा

वर्ष 2025-26 की धान खरीदी अवधि में धान गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर कबीरधाम जिले में राज्यभर में सबसे अधिक 6 एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें से 2 मामलों में गिरफ्तारी होने की जानकारी भी दी गई है।

वहीं, शेष 4 एफआईआर में अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में पहले से धान गड़बड़ी के मामलों में कार्रवाई के बावजूद बड़ी मात्रा में स्टॉक का अंतर सामने आने से विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

आकाश केशरवानी ने उठाए सवाल, जांच और वसूली की मांग

युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने कबीरधाम जिले में धान खरीदी के दौरान खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

केशरवानी ने कहा कि धान खरीदी में निर्धारित सीमा से अधिक कमी पाए जाने पर संबंधित सोसायटी के विरुद्ध कार्रवाई और एफआईआर का प्रावधान होने के बावजूद 3 प्रतिशत से अधिक धान की कमी वाली समितियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह जांच का विषय है।

उन्होंने कहा कि जिले की कई समितियों में 1,000 क्विंटल से अधिक धान की कमी सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

केशरवानी ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि धान की कमी किस स्तर पर हुई। उन्होंने जिला विपणन विभाग, जिला सहकारिता विभाग, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक तथा संबंधित नोडल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है।

उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर धान के सुरक्षित भंडारण, सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी थी, उनकी भूमिका की जांच कर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही धान की कमी से हुई आर्थिक क्षति की भरपाई और दोषियों से राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

 

कामठी उपार्जन केंद्र में 3,146 क्विंटल धान की कमी

कबीरधाम जिले के कामठी उपार्जन केंद्र में भी बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां कुल 99,308 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। अंतिम मिलान के बाद इसमें 3,146 क्विंटल धान कम पाया गया।

 

बताई गई मात्रा के अनुसार यह कमी करीब 3 प्रतिशत से अधिक बैठती है। 3,146 क्विंटल धान की अनुमानित कीमत 97 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने के बावजूद संबंधित समिति के विरुद्ध अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह भी है कि खरीदी के दौरान स्टॉक की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों ने इस अंतर को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा।

उसरवाही उपार्जन केंद्र में 1,993 क्विंटल धान कम

उसरवाही उपार्जन केंद्र में भी अंतिम मिलान के बाद धान के स्टॉक में अंतर सामने आने की जानकारी है। यहां कुल 1,01,968 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी।

अंतिम मिलान में 1,993 क्विंटल धान की कमी बताई जा रही है, जो कुल खरीदी का लगभग 1.95 प्रतिशत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस धान की अनुमानित कीमत 61 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में धान के स्टॉक में अंतर सामने आने के बाद इसकी जिम्मेदारी और कमी के कारणों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

बोदा (तरेगांव जंगल) केंद्र में 1,434 क्विंटल धान की कमी

इसी तरह बोदा (तरेगांव जंगल) उपार्जन केंद्र में भी स्टॉक में बड़ी कमी की जानकारी सामने आई है। यहां कुल 36,122 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी।

अंतिम मिलान में 1,434 क्विंटल धान कम पाया गया। इस मात्रा की अनुमानित कीमत 44 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उपार्जन केंद्र में खरीदी के बाद धान के भंडारण और परिवहन के दौरान स्टॉक की निगरानी किस प्रकार की गई और अंतिम मिलान में सामने आई कमी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

अब जांच और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार

कबीरधाम जिले में 38,428 क्विंटल धान के स्टॉक अंतर का मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह कमी किन परिस्थितियों में हुई। क्या यह सामान्य शॉर्टेज है, रिकॉर्ड संबंधी अंतर है, भंडारण अथवा परिवहन से जुड़ी समस्या है या फिर कहीं गंभीर अनियमितता हुई है—इसका स्पष्ट जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

फिलहाल मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। आकाश केशरवानी ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित समितियों की जवाबदेही तय करने, आर्थिक क्षति की वसूली करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना होगा कि खाद्य एवं सहकारिता विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और 38,428 क्विंटल धान के अंतर की वास्तविक वजह जांच में क्या सामने आती है।

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