गतिविधि आधारित शिक्षा ने बदली स्कूल की तस्वीर, व्याख्याता संतोष कुमार साहू राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित..

कवर्धा/पंडरिया, 5 सितंबर 2026। विकासखंड पंडरिया के वनांचल क्षेत्र में स्थित शासकीय हाई स्कूल सोमनापुर (नया) के उत्कृष्ट व्याख्याता संतोष कुमार साहू ने सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, गतिविधि आधारित शिक्षा और जनसहभागिता के माध्यम से विद्यालय की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और अभिनव प्रयासों के लिए उन्हें शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को लोकभवन स्थित ‘छत्तीसगढ़ मंडपम’ में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम रमेन कुमार डेका के करकमलों द्वारा प्रतिष्ठित ‘राज्यपाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

संतोष कुमार साहू की इस उपलब्धि से उनके परिवार, सहकर्मियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और क्षेत्र के शिक्षक-शिक्षिकाओं में हर्ष का माहौल है। ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के एक विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के उनके प्रयासों को इस सम्मान के माध्यम से राज्य स्तर पर पहचान मिली है।


नवाचार और गतिविधि आधारित शिक्षा बनी सफलता की कुंजी

व्याख्याता संतोष कुमार साहू ने पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ-साथ गतिविधि आधारित एवं नवाचारी शिक्षा को अपनाकर विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा विकसित की। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एवं कम लागत वाली सामग्री का उपयोग कर विभिन्न प्रकार की शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तैयार की।

उनका मानना है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय यदि उन्हें गतिविधियों, प्रयोगों, खेल, चित्रकला और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से पढ़ाया जाए तो वे विषयों को अधिक सहजता से समझते हैं। इसी सोच को उन्होंने विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

जिले का पहला तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान बना स्कूल

संतोष कुमार साहू के प्रयासों का असर केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा। उनके अथक प्रयासों और जनजागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप शासकीय हाई स्कूल सोमनापुर (नया) जिले का पहला तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान बनने में सफल रहा।

विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों और समुदाय को भी तंबाकू एवं नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। नशामुक्ति, स्वच्छता, वृक्षारोपण और बाल विवाह निषेध जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों में विद्यार्थियों तथा अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।

राज्य की मेरिट सूची से जापान यात्रा तक विद्यार्थियों ने बनाई पहचान

विद्यालय के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम जिले और राज्य स्तर तक पहुंचाया है। उनके मार्गदर्शन में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों ने राज्य की मेरिट सूची में स्थान बनाने से लेकर जापान यात्रा तक विभिन्न उपलब्धियां हासिल की हैं।

इन उपलब्धियों ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया कि बेहतर मार्गदर्शन, अवसर और मेहनत के दम पर ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के बच्चे भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

बेहतर शिक्षा के कारण प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थी भी पहुंचे

शासकीय हाई स्कूल सोमनापुर (नया) में शिक्षा की गुणवत्ता और विभिन्न गतिविधियों के बेहतर संचालन का असर विद्यालय के नामांकन पर भी दिखाई दिया है। यहां की बेहतर पढ़ाई एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण से प्रभावित होकर प्राइवेट एवं अन्य विद्यालयों के विद्यार्थी भी यहां अध्ययन के लिए आने लगे हैं।

परिणामस्वरूप विद्यालय में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या यानी Enrollment में लगातार वृद्धि हुई है। खेल, चित्रकला, प्रयोगात्मक कार्य और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की संतोष कुमार साहू की पहल को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान पर विशेष जोर

संतोष कुमार साहू ने बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के लिए मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को शिक्षण का आधार बनाया। कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक यानी Remedial Education की व्यवस्था की गई, ताकि किसी भी बच्चे की सीखने की प्रक्रिया बाधित न हो।

उन्होंने सतत पालक संपर्क के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा से जोड़ा और शत-प्रतिशत नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए।

शत-प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम ने बढ़ाया स्कूल का गौरव

विद्यालय ने बोर्ड परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उनकी उपस्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाया जाता है। इससे विद्यार्थियों में नियमित विद्यालय आने और पढ़ाई के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई है।

बाल विज्ञान कांग्रेस से शालेय क्रीड़ा तक शानदार प्रदर्शन

विद्यालय के विद्यार्थी विभिन्न शैक्षणिक, खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों में भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। बाल विज्ञान कांग्रेस, राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता, ओलंपियाड और श्रेष्ठ इको क्लब जैसी गतिविधियों में विद्यालय की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं।

इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ विज्ञान, खेल, पर्यावरण और रचनात्मक सोच के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

जनसहयोग और स्वयं के प्रयासों से बदला विद्यालय परिसर

संतोष कुमार साहू ने विद्यालय को बेहतर और आकर्षक बनाने के लिए स्वयं के व्यय के साथ-साथ जनसहयोग का भी उपयोग किया। उनके प्रयासों से शाला भवन को आकर्षक बनाने और विद्यालय परिसर को हरा-भरा रखने की दिशा में कार्य किया गया।

वृक्षारोपण एवं स्वच्छता गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बनाया गया। इससे विद्यालय का वातावरण भी अधिक सकारात्मक एवं सीखने के अनुकूल बना।

सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे संतोष साहू

शिक्षण कार्य के साथ संतोष कुमार साहू ने सामाजिक सरोकारों को भी अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता, जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सहयोग, निःशुल्क स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने में सहयोग, बाल विवाह निषेध एवं नशामुक्ति जागरूकता जैसे कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए ग्रीष्मकालीन समर कैंप का आयोजन और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन जैसी गतिविधियों को भी उन्होंने प्रभावी ढंग से संचालित किया।

50 से अधिक पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

राज्यपाल पुरस्कार से पहले भी व्याख्याता संतोष कुमार साहू को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण (श्रेष्ठ प्राचार्य), शिक्षा श्री, उत्कृष्ट व्याख्याता, राधाकृष्णन सम्मान, 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम सम्मान, विकसित भारत संकल्प अभियान और बाल संरक्षण सम्मान सहित 50 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

लगातार मिलने वाले इन सम्मानों से उनके शैक्षणिक नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की व्यापक पहचान का अंदाजा लगाया जा सकता है।

राज्यपाल पुरस्कार से बढ़ा वनांचल क्षेत्र का गौरव

शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित होना संतोष कुमार साहू के साथ-साथ शासकीय हाई स्कूल सोमनापुर (नया), पंडरिया विकासखंड और पूरे कबीरधाम जिले के लिए गौरव की बात है।

उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि शिक्षा में बदलाव के लिए केवल बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि नवाचार, समर्पण, निरंतर प्रयास और समुदाय की भागीदारी से सीमित संसाधनों में भी उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने और सम्मान प्राप्त करने पर उनके परिजनों, मित्रों, विद्यार्थियों, सहकर्मियों एवं अंचल के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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