एकलव्य विद्यालय तरेगांव जंगल में सुविधाओं की कमी का आरोप, पालकों ने कलेक्टर से की जांच और कार्रवाई की मांग..
कबीरधाम/बोड़ला। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, तरेगांव जंगल, विकासखंड बोड़ला में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पालकों ने गंभीर चिंता जताई है। पालकगणों ने जिला कलेक्टर कबीरधाम को सहायक आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर विद्यालय की व्यवस्थाओं की जांच कराने तथा समस्याओं का समयबद्ध निराकरण कराने की मांग की है।
पालकों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्हें शासन द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया है। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध शिकायत करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम की समीक्षा की मांग
ज्ञापन में पालकों ने विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षक होने के बावजूद विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात कही है। पालकों ने विगत दो-तीन वर्षों में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों की निष्पक्ष समीक्षा कर विद्यालय की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन कराने की मांग की है।




पालकों के अनुसार परीक्षा परिणामों की समीक्षा के आधार पर जहां कमियां सामने आएं, वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
रेमेडियल कक्षाओं की नियमित मॉनिटरिंग की मांग
कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए संचालित रेमेडियल कक्षाओं को लेकर भी पालकों ने शिकायत दर्ज कराई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इन कक्षाओं के संचालन में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है।
पालकों ने रेमेडियल कक्षाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं पढ़ाई की प्रगति की समीक्षा करने तथा इन कक्षाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने की मांग की है।
जर्जर छात्रावास भवन को लेकर चिंता
ज्ञापन में छात्रावास भवन की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। पालकों का कहना है कि भवन कई स्थानों पर जर्जर स्थिति में है। बरसात के दौरान कुछ स्थानों से पानी टपकने तथा प्लास्टर/लाटर उखड़ने जैसी समस्याएं सामने आने की शिकायत की गई है। लंबे समय से भवन में रंग-रोगन और आवश्यक रखरखाव नहीं होने की बात भी ज्ञापन में कही गई है।

पालकों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए छात्रावास भवन का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत, रखरखाव और रंग-रोगन कराने की मांग की है।
एक बिस्तर पर दो विद्यार्थियों के सोने का दावा
पालकों ने छात्रावास में विद्यार्थियों की शयन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर समस्या बताई है। ज्ञापन के अनुसार विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं होने के कारण एक बिस्तर पर दो-दो विद्यार्थियों के सोने की स्थिति बन रही है।
इसके अलावा एक कमरे में 30 से 40 विद्यार्थियों को एक साथ रखने की शिकायत भी पालकों ने की है। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों को असुविधा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए पर्याप्त एवं उचित शयन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
250 सीटर छात्रावास में करीब 420 विद्यार्थियों का दावा
पालकों ने विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या और छात्रावास की क्षमता के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में बताया गया है कि वर्तमान छात्रावास की क्षमता लगभग 250 विद्यार्थियों की है, जबकि विद्यालय में करीब 420 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

पालकों के अनुसार निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों के निवास के कारण आवास, शयन व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप नवीन एवं पर्याप्त क्षमता वाले छात्रावास भवन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने की मांग की गई है।
अतिरिक्त भवन के उपयोग और कब्जे की जांच की मांग
पालकों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं आवश्यक सुविधाओं के लिए शासन द्वारा निर्मित अतिरिक्त भवन के उपयोग और कब्जे की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि भवन विद्यार्थियों के हित में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसका उपयोग विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हाउस मास्टर की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
आवासीय विद्यालय में विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, अनुशासन और दैनिक समस्याओं की निगरानी के लिए नियुक्त हाउस मास्टर की कार्यप्रणाली को लेकर भी पालकों ने शिकायत की है।
पालकों का आरोप है कि कुछ हाउस मास्टर अपने दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरत रहे हैं। उन्होंने हाउस मास्टर के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग तथा आकस्मिक निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
पालकों ने की 10 सूत्रीय मांग
ज्ञापन के माध्यम से पालकों ने प्रशासन के समक्ष प्रमुख रूप से 10 मांगें रखी हैं। इनमें विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता की निष्पक्ष समीक्षा, कक्षा 10वीं एवं 12वीं के पिछले वर्षों के परीक्षा परिणामों का विश्लेषण, रेमेडियल कक्षाओं का प्रभावी संचालन, जर्जर छात्रावास की तत्काल मरम्मत एवं रंग-रोगन, प्रत्येक विद्यार्थी के लिए पर्याप्त शयन व्यवस्था तथा विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप नवीन छात्रावास भवन की स्वीकृति शामिल है।
इसके अलावा अतिरिक्त भवन के उपयोग एवं कब्जे की जांच, हाउस मास्टर एवं संबंधित कर्मचारियों के कार्यों की नियमित निगरानी, विद्यालय की शिक्षा-स्वास्थ्य-सुरक्षा-आवास एवं अनुशासन व्यवस्था का स्थल निरीक्षण तथा पालक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में विद्यालय की समस्याओं का परीक्षण कर समयबद्ध निराकरण कराने की मांग की गई है।
- “किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है शिकायत” — पालक
ज्ञापन में पालकों ने स्पष्ट किया है कि उनकी शिकायत किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना से प्रेरित नहीं है। उनका कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पालकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय का स्थल निरीक्षण कराने और ज्ञापन में उठाई गई समस्याओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
इन अधिकारियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
पालकों द्वारा ज्ञापन की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई एवं सूचनार्थ संबंधित जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई है। इनमें सांसद, संसदीय क्षेत्र राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्री तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री को प्रतिलिपि भेजे जाने का उल्लेख है।
अब देखना होगा कि प्रशासन द्वारा पालकों की शिकायतों पर क्या संज्ञान लिया जाता है और विद्यालय की व्यवस्थाओं की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

