छत्तीसगढ़ विधानसभा में ऐतिहासिक कदम: प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने वाला सख्त विधेयक पारित,पढ़े पुरा समाचार…?
Historic step in Chhattisgarh Assembly: Strict bill passed to prevent irregularities in competitive examinations, read the full news...?

रायपुर, शुक्रवार। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। “छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026” को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन के साथ मंजूरी मिली। इस कानून का उद्देश्य राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली, नकल और संगठित परीक्षा घोटालों पर कड़ा अंकुश लगाना है।
🔍 कड़े प्रावधानों से नकल माफिया पर नकेल
नए कानून में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत—
- दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा
- अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
- नकल में शामिल अभ्यर्थियों को 3 वर्षों तक ब्लैकलिस्ट
- संगठित अपराध की स्थिति में संपत्ति जब्ती और कुर्की
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के जरिए नकल करने वालों पर विशेष निगरानी और कठोर कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
🗣️मुख्यमंत्री का बयान: “ईमानदार प्रतिभा को मिलेगा हक”
विधेयक पर चर्चा के दौरान विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य के युवा विकास की धुरी हैं, लेकिन पूर्व में उनके भविष्य के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं देखने को मिलीं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी, जिसके परिणामस्वरूप कई आरोपी जेल तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा—
“यह कानून नकल गिरोहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और ईमानदार प्रतिभाओं को उनका हक दिलाएगा।”
⚖️ जांच प्रक्रिया होगी पारदर्शी और जवाबदेह
कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच पुलिस उप निरीक्षक (SI) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य एजेंसियों की सहायता भी ली जा सकेगी।
इसके साथ ही, परीक्षा आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं (एजेंसियों) की जवाबदेही भी तय की गई है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
📚 कानून का व्यापक दायरा
यह विधेयक राज्य की सभी प्रमुख भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा, जिनमें—
- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC)
- व्यापमं (Vyapam)
- विभिन्न निगम-मंडल और शासकीय संस्थाएं
शामिल हैं। इससे पूरे भर्ती तंत्र में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
🤝 विपक्ष का समर्थन, पर राजनीतिक टिप्पणी पर आपत्ति
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पूर्ववर्ती सरकार पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि—
“ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए और ध्यान केवल छात्रों के हित पर केंद्रित होना चाहिए।”
📈 युवाओं में बढ़ी उम्मीदें
इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से परीक्षा घोटालों और अनियमितताओं से परेशान युवा अब एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रणाली की उम्मीद कर रहे हैं।
✍️ निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम न केवल परीक्षा प्रणाली को मजबूत करेगा, बल्कि योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के लिए एक सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल भी तैयार करेगा। आने वाले समय में इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।




