
राजा नवागांव / जिला- कबीरधाम ~ धान खरीदी में आ रही तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों के चलते किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला राजा नवागांव निवासी किसान पूनऊ पटेल पिता भगवानी पटेल का सामने आया है, जो पिछले एक माह से तहसील कार्यालय और अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। धान नहीं बिक पाने के कारण किसान ने अपनी बेटी की आगामी शादी के लिए कलेक्टर से गुहार लगाते हुए PWD (प्वाइंट) विभाग से सहायता राशि दिलाने की मांग की है।

किसान पूनऊ पटेल ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ 14 डिसमिल भूमि में धान की फसल लगाई है। फसल का पूरा विवरण ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज है और भौतिक सत्यापन में भी फसल दर्शाई जा रही है। इसके बावजूद जब वे धान विक्रय के लिए टोकन कटवाने पहुंचे, तो पता चला कि उनके नाम से केवल 40 क्विंटल 80 किलो का ही टोकन कट रहा है, जबकि उनका कुल उत्पादन 66 क्विंटल है। किसान का कहना है कि 40 क्विंटल 80 किलो धान उन्होंने अब तक बेचा ही नहीं है, फिर भी रिकॉर्ड में बिक्री दर्शाई जा रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूनऊ पटेल ने बताया कि उनकी बेटी की शादी करीब एक माह बाद तय है, जिसके लिए कम से कम ₹1 लाख 25 हजार की आवश्यकता है। धान नहीं बिकने से उनके पास कोई आर्थिक साधन नहीं बचा है। उन्होंने शासन-प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव अपने घर के निजी कार्य के लिए 97 लाख रुपये मांग सकते हैं, तो एक गरीब किसान को उसकी बेटी की शादी के लिए उसके धान की रकम दिलाने में सरकार क्यों पीछे हट रही है।

किसान ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि या तो उनका पूरा 66 क्विंटल धान शासन द्वारा खरीदा जाए, जिससे उन्हें ₹2 लाख 4600 की राशि प्राप्त हो सके, या फिर इसी राशि को PWD विभाग से सहायता के रूप में उनके घर के निजी कार्य (बेटी की शादी) के लिए दिलाया जाए। किसान ने यह भी कहा कि जब तक उनकी पूरी राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे धान बेचने को तैयार नहीं हैं।
इस पूरे मामले में किसान कांग्रेस ने किसान का खुलकर समर्थन किया है। मौके पर किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी, युवा नेता वाल्मीकि वर्मा, किसान कांग्रेस के महामंत्री जलेश बघेल, रामदास पटेल, नेमीचंद पटेल, शत्रुघ्न कोसले सहित कई किसान उपस्थित रहे। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसान कांग्रेस आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।
फिलहाल किसान की गुहार के बाद यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन किसान की समस्या का कब और कैसे समाधान करता है।




