खिलौना बैंक से बच्चों के चेहरे पर आई मुस्कान, एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग सहसपुर लोहारा द्वारा हुआ विशेष आयोजन
घर में रखे अच्छे पुराने खिलौनों को आंगनबाड़ी केंद्र के खिलौना बैंक में दान करने की अपील, खेल-खेल में बच्चों के सीखने और सर्वांगीण विकास पर दिया गया जोर
सहसपुर लोहारा/कबीरधाम। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने और उनके शारीरिक, मानसिक एवं रचनात्मक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहसपुर लोहारा में खिलौना बैंक को लेकर विशेष आयोजन किया गया। 5 अक्टूबर 2026 को शीतला मंदिर मंच, सहसपुर लोहारा में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों के लिए खिलौनों की उपयोगिता और समाज की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक हुआ। इस दौरान लोगों को प्रेरित किया गया कि घरों में रखे ऐसे पुराने खिलौने, जिनका उपयोग अब बच्चे नहीं करते, उन्हें फेंकने के बजाय आंगनबाड़ी केंद्र के खिलौना बैंक में जमा कराया जाए। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक बच्चों के लिए नए खिलौने भी दान कर सकते हैं।
पुराने खिलौने बन सकते हैं किसी बच्चे की नई खुशी
आज कई घरों में ऐसे खिलौने रखे रहते हैं, जिनसे बच्चे खेलना बंद कर चुके हैं। ये खिलौने भले ही एक बच्चे के लिए पुराने हो गए हों, लेकिन किसी दूसरे बच्चे के लिए वही खिलौना खुशी, मनोरंजन और सीखने का माध्यम बन सकता है।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए खिलौना बैंक की पहल की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र में एकत्र किए गए उपयोग योग्य खिलौनों को बच्चों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे बच्चों को खेल के साथ-साथ अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया को मिलेगा बढ़ावा
खिलौना बैंक का उद्देश्य केवल बच्चों को खेलने के लिए खिलौने उपलब्ध कराना नहीं है। इसके पीछे खेल के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।


बच्चों के लिए खेल उनकी प्रारंभिक शिक्षा का अहम हिस्सा होता है। खिलौनों के माध्यम से बच्चे चीजों को समझने, उन्हें पहचानने, अपनी कल्पनाओं को व्यक्त करने और दूसरों के साथ मिलकर खेलने जैसी गतिविधियों को सीखते हैं।
आयोजन के माध्यम से बताया गया कि खिलौनों के उपयोग से बच्चों में कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। सामूहिक खेलों के माध्यम से बच्चों में साझेदारी, सहयोग और सामाजिक व्यवहार की भावना भी विकसित होती है।
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक
उचित खिलौने बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में भी सहायक हो सकते हैं। खेल के दौरान बच्चों की गतिविधियां उन्हें सक्रिय रखने के साथ-साथ उनकी सोचने-समझने की क्षमता को विकसित करने में मदद करती हैं।

खिलौना बैंक के माध्यम से बच्चों को अलग-अलग प्रकार के खिलौनों से खेलने और सीखने का अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। यह पहल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
खिलौना बैंक के प्रमुख लाभ
कार्यक्रम में खिलौना बैंक से बच्चों को होने वाले विभिन्न लाभों पर प्रकाश डाला गया। इनमें प्रमुख रूप से—
- बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का विकास।
- सीखने की क्षमता को बढ़ावा।
- खेल-खेल में शिक्षा की प्रक्रिया को मजबूत करना।
- बच्चों में साझेदारी और सहयोग की भावना विकसित करना।
- शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहयोग।
- प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद।
- बच्चों को खेलने और सीखने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना।
- समाज में जनभागीदारी और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना।
नागरिकों से खिलौने दान करने की अपील
आयोजन के दौरान आम नागरिकों से इस पहल से जुड़ने की अपील की गई। लोगों से कहा गया कि उनके घरों में यदि ऐसे खिलौने हैं जो अच्छी स्थिति में हैं और अब बच्चों के उपयोग में नहीं आ रहे, तो उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र के खिलौना बैंक में दिया जा सकता है।

इसके अलावा बच्चों के लिए नए खिलौने दान करने के इच्छुक नागरिक भी इस पहल में अपना योगदान दे सकते हैं।
इस पहल का मूल संदेश यही है कि घर में रखा अनुपयोगी खिलौना किसी दूसरे बच्चे के लिए बेहद कीमती हो सकता है। एक खिलौना किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के साथ उसके सीखने और विकास का माध्यम भी बन सकता है।
कार्यक्रम में ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
खिलौना बैंक से जुड़े इस विशेष आयोजन में शिवचरण पटेल, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुधांशु मिश्रा, एकीकृत महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी रीना ठाकुर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी तेज सिंह चंद्रवंशी, आत्माराम साहू सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और नागरिकगण मौजूद रहे।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं नीता श्रीवास्तव, सूरज रजक, गोदावरी पटवा और शरला यादव की भी उपस्थिति रही।
समाज की भागीदारी से मजबूत होगी पहल
खिलौना बैंक जैसी पहल तभी अधिक प्रभावी हो सकती है, जब इसमें समाज के लोग भी सक्रिय रूप से भागीदारी करें। घरों में अनुपयोगी पड़े अच्छे खिलौनों को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने से एक ओर बच्चों को खेलने और सीखने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पुनः उपयोग और सामाजिक सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।
सहसपुर लोहारा में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के प्रति समाज की जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता नजर आया। यदि अधिक से अधिक लोग अपने घरों के उपयोग योग्य खिलौने खिलौना बैंक को उपलब्ध कराते हैं, तो इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खेल एवं सीखने की सामग्री का बेहतर संसाधन तैयार किया जा सकता है।

