बोड़ला में सड़क की बदहाली: कीचड़ में कैद ग्रामीण, घर तक नहीं पहुंचते वाहन..
कीचड़ में कैद ग्रामीणों की जिंदगी! घर तक नहीं पहुंचते वाहन, किलोमीटर दूर खड़ी करनी पड़ती हैं गाड़ियां
कवर्धा/बोड़ला। कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत ग्राम पंचायत समनापुर जंगल में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के मौसम में कोरकोट मोहल्ला आंगनबाड़ी केंद्र से घांघरा टोला तक का रास्ता कीचड़, पानी और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है। सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि ग्रामीणों के लिए अपने घर तक वाहन पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में इस मार्ग से आवागमन करना किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क पर जगह-जगह पानी जमा होने और दलदल जैसी स्थिति बनने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फंसने का खतरा बना रहता है। कई ग्रामीणों को मजबूरी में अपनी गाड़ियां घर से काफी दूर दूसरे लोगों के घरों या सुरक्षित स्थानों पर खड़ी करनी पड़ती हैं, जिसके बाद उन्हें पैदल चलकर अपने घर पहुंचना पड़ता है।
बारिश होते ही सड़क बन जाती है मुसीबत
कोरकोट मोहल्ला आंगनबाड़ी केंद्र से घांघरा टोला तक जाने वाला यह रास्ता बारिश के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बन रहा है। कच्ची सड़क पर पानी जमा होने के साथ ही कई हिस्सों में गहरे गड्ढे और कीचड़ फैल गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन लगातार बारिश होने पर रास्ते की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। पैदल चलने वालों को भी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है।
घर से दूर खड़ी करनी पड़ रही गाड़ियां
सड़क की खराब स्थिति का सबसे सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। जिन ग्रामीणों के पास बाइक या अन्य वाहन हैं, वे बारिश के दौरान अपने वाहन घर तक नहीं ले जा पा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कई ग्रामीणों को सड़क की खराब स्थिति के कारण अपने वाहन दूसरे लोगों के घरों में या सड़क के ऐसे हिस्से में खड़े करने पड़ते हैं, जहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो। इसके बाद उन्हें सामान लेकर पैदल अपने घर तक जाना पड़ता है।

ग्रामीणों के लिए यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि बारिश के पूरे मौसम में रोजाना की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है।
स्कूल, आंगनबाड़ी और जरूरी काम के लिए भी परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक इस रास्ते से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य लोगों का नियमित आना-जाना होता है। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए ग्रामीणों को इसी मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है।
सड़क की खराब हालत के कारण बच्चों और बुजुर्गों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कीचड़ और फिसलन के बीच पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
आपात स्थिति में बढ़ सकती है मुश्किल
ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सामान्य दिनों में तो किसी तरह परेशानी झेली जा सकती है, लेकिन बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में यही रास्ता बड़ी समस्या बन सकता है।
खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को जरूरत के समय घर से बाहर ले जाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि सड़क की स्थिति इसी तरह बनी रही तो बारिश के दौरान आपातकालीन आवागमन को लेकर ग्रामीणों की चिंता और बढ़ सकती है।
लंबे समय से सड़क सुधार की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित ग्राम पंचायत और प्रशासन से मांग की है कि कोरकोट मोहल्ला आंगनबाड़ी केंद्र से घांघरा टोला तक सड़क का जल्द से जल्द सुधार कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर मिट्टी-मुरुम डालने, जल निकासी की व्यवस्था करने और आवश्यकतानुसार सड़क को व्यवस्थित तरीके से बनाने की जरूरत है, ताकि बारिश के मौसम में आवागमन बाधित न हो।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि पंचायत और संबंधित विभाग मौके की स्थिति का निरीक्षण कर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।
जिम्मेदार विभाग कब लेगा संज्ञान?
समनापुर जंगल क्षेत्र में सड़क की मौजूदा स्थिति ने ग्रामीणों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर कब तक उन्हें कीचड़ और खराब रास्ते के बीच आवागमन की मजबूरी झेलनी पड़ेगी?
बारिश के दौरान सड़क की स्थिति लगातार खराब होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है। अब देखना होगा कि संबंधित पंचायत और प्रशासन इस समस्या का संज्ञान लेकर सड़क सुधार के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।

