S.LOHARA BREAKING- कुम्हारदनिया में CC सड़क निर्माण पर सवाल, कुछ ही दिनों में दरारों से भर गई ₹13.56 लाख की सड़क,सड़क चढ़ रहा भ्रस्टाचार के भेट,पढ़े पूरा समाचार? ?

कवर्धा/सहसपुर लोहारा । कबीरधाम जिले के सहसपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुम्हारदनिया में ग्रामीण सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां ₹13.56 लाख की लागत से निर्मित सीमेंट कंक्रीट (CC) सड़क निर्माण पूरा होने के महज कुछ ही दिनों बाद दरारों से भर गई है। सड़क की इस स्थिति ने न केवल निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सरकारी धन के सही उपयोग को लेकर भी संदेह पैदा कर दिया है।

20 दिनों में पूरा हुआ निर्माण, गुणवत्ता पर उठे सवाल
सूचना फलक के अनुसार यह CC सड़क वर्ष 2025–26 के अंतर्गत बनाई गई। कार्य की शुरुआत 20 मई 2025 को हुई और 8 जून 2025 को इसे पूर्ण बताया गया, यानी करीब 20 दिनों में सड़क निर्माण पूरा कर लिया गया। इतनी कम अवधि में बने इस सड़क कार्य में शुरुआती दिनों में ही दरारें दिखाई देना निर्माण प्रक्रिया, सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क से लंबे समय तक आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के तुरंत बाद दरारें आ जाना भविष्य में इसके और अधिक क्षतिग्रस्त होने का संकेत है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि अभी स्थिति यह है, तो आने वाले बरसात के मौसम में सड़क की हालत और खराब हो सकती है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों की राय: शुरुआती दरारें गंभीर लापरवाही का संकेत

निर्माण क्षेत्र के जानकारों के अनुसार CC सड़क में शुरुआती दिनों में दरारें आना सामान्य बात नहीं मानी जाती। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें घटिया सामग्री का उपयोग, निर्धारित मानकों के अनुरूप मिश्रण न होना, उचित क्योरिंग न किया जाना या फिर तकनीकी निरीक्षण में लापरवाही प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कार्य एजेंसी के साथ-साथ तकनीकी सहायक, उप अभियंता और भुगतान को स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी होती है।
नियमों में कार्रवाई का प्रावधान

सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े नियमों के अनुसार यदि जांच में निर्माण में कमी या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित एजेंसी से भुगतान की वसूली, ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद, समाचार लिखे जाने तक ग्राम पंचायत कुम्हारदनिया या जिला प्रशासन कवर्धा की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जवाब का इंतजार
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या गुणवत्ता जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन समय रहते कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर रोक लग सके और सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो।




