मोदी की ईदी,जानिये क्या है मोदी की ईदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सौगात-ए-मोदी ने एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ईद के मौके पर सौगात-ए-मोदी किट लाखों गरीब मुसलमानों को बांटी जा रही है। ये पहला मौका है जब किसी प्रधानमंत्री का सीधा ध्यान गरीब मुसलमानों की तरफ गया है। राजनीतिक दृष्टिकोण से इसके कई मायने निकाले जा सकते हैं लेकिन सामाजिक पक्ष तो ये है कि मोदी किट ने गरीब मुसलमानों के एक बहुत बड़े तबके में ईद की खुशी को दुगुना कर दिया है। भारत में मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा गरीबी और अशिक्षा की मार झेल रहा है। दशकों तक मुसलमानों के इस तबके की ओर शायद ही किसी सरकार ने गंभीरता दिखाई हो। आरक्षण के नाम पर तुष्टिकरण की चर्चाएं राजनीति का खास विषय हो सकता है लेकिन गरीबी और बदहाली के विषय कभी राजनीति के केंद्र में नहीं रहे। गरीबी चाहे जिस समाज में भी हो वह राष्ट्रीय चिंता के विषय हैं।
मीडिया में मोदी किट सुर्खियां बटोर रही हैं। सुर्ख़ियों का कारण भी साफ़ है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान मुसलमानों के उन चेहरों पर गया जो बेहद हताशा के दौर से गुज़र रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो किट के बहाने मोदी सरकार मुसलमानों के मन टटोल रही है। प्रतिपक्षी इसे तुष्टिकरण मानते हैं। मोदी सरकार के लिए यह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के नेताओं में मोदी किट का जिस उत्साह से स्वागत किया है उससे यह लगता है कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ेगा, यह एक राजनीतिक विचार हो सकता है। इससे जुदा एक पक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का है जो लंबे समय से मत भिन्नताओं के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने इसे मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस समय वक्फ बिल पर विपक्षी हमलों से घिरे हैं लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सभी आलोचनाओं के बीच भी मोदी किट मुसलमानों में ईद की मीठास तो घोलेगी ही। करोड़ों मुसलमानों का ध्यान मोदी की तरफ जाएगा। हिंदू – मुस्लिम राजनीति को धक्का लगेगा। ईद और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ‘नव संवत्सर’ विक्रम संवत् 2082 के बीच खुशियों का पर्व सामाजिक समरसता को बढ़ाने में ऐसे अनेक प्रयासों को जरूर सफलता मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सौगात-ए-मोदी का अगला पड़ाव इस बार छत्तीसगढ़ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर प्रवास में 33,700 करोड़ रुपये से अधिक की विद्युत, तेल और गैस, रेल, सड़क, शिक्षा एवं आवास क्षेत्रों से संबंधित कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने वाले हैं।प्रधानमंत्री देश भर में बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके अनुरूप, सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने और छत्तीसगढ़ को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। बिलासपुर जिले में एनटीपीसी की सीपत सुपर थर्मल पावर परियोजना चरण- III (1×800एमडब्ल्यू) की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत 9,790 करोड़ रुपये से अधिक है। यह पिट हेड परियोजना उच्च बिजली उत्पादन दक्षता के साथ अत्याधुनिक अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित है। वह छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) की 15,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली पहली सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना (2X660एमडब्ल्यू) के कार्य की शुरुआत करेंगे। वह पश्चिमी क्षेत्र विस्तार योजना (डब्ल्यूआरईएस) के तहत 560 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली पावरग्रिड की तीन विद्युत पारेषण परियोजनाओं को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुआयामी विकास का विज़न सौगात के कई चरणों में अर्पित है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सरकार की अगुवाई में छत्तीसगढ़ में भी विकास की अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं का शुभारंभ वास्तव में मोदी की ईदी है।

डॉ शाहिद अली
लेखक मीडिया शिक्षाविद हैं।




