कवर्धा: सहकारिता विभाग के निमंत्रण पत्र में बड़ी चूक, जनपद अध्यक्ष सुषमा बघेल का नाम फिर गायब
कवर्धा, 6 जुलाई (सोमवार)। सहकारिता विभाग द्वारा सहकारिता सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र जारी होते ही नया विवाद खड़ा हो गया है।
आज 6 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में जिले के कई जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं, लेकिन जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष सुषमा बघेल का नाम एक बार फिर सूची से गायब होने पर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, सहकारिता सप्ताह के समापन समारोह को लेकर विभाग ने विधिवत आमंत्रण पत्र जारी किया था। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन जनपद पंचायत कवर्धा की निर्वाचित अध्यक्ष का नाम शामिल नहीं किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि पूर्व में भी सरकारी आयोजनों के निमंत्रण पत्रों में इसी प्रकार की चूक सामने आ चुकी है।
लगातार एक ही जनप्रतिनिधि का नाम निमंत्रण पत्र से अनुपस्थित रहने पर इसे महज तकनीकी त्रुटि मानने के बजाय सुनियोजित उपेक्षा की आशंका भी जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि बार-बार एक ही निर्वाचित प्रतिनिधि की अनदेखी होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान और उन्हें सरकारी आयोजनों में उचित स्थान देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि की उपेक्षा न केवल उस व्यक्ति का बल्कि उसके क्षेत्र की जनता के जनादेश का भी अनादर माना जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और विभाग की कार्यशैली को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। यदि यह वास्तव में विभागीय लापरवाही है तो भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर जानबूझकर ऐसा किया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में सहकारिता विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग इस गंभीर चूक को स्वीकार कर सुधारात्मक कदम उठाता है या फिर इसे सामान्य त्रुटि बताकर मामला समाप्त करने का प्रयास करता है।
लगातार सामने आ रही इस प्रकार की घटनाओं ने प्रशासनिक कार्यशैली और सरकारी आयोजनों की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में विभाग की प्रतिक्रिया और प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
प्रधान संपादक – राजा श्रीवास्तव की रिपोर्ट.
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