PM मोदी के अपील के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन अनिवार्य करने की मांग तेज, सोशल मीडिया पोस्ट ने छेड़ी नई बहस,पढ़े पुरा समाचार…?

नई दिल्ली। देश में बढ़ती ईंधन खपत, वीआईपी संस्कृति और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें प्रधानमंत्री से एक अनोखी अपील की गई है। पोस्ट में सुझाव दिया गया है कि पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए बड़े-बड़े वीआईपी काफिलों की बजाय नौकरशाहों, विधायकों और सांसदों को सार्वजनिक बसों और मेट्रो सेवाओं का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए।

वायरल संदेश में कहा गया है कि यदि जनप्रतिनिधि और उच्च अधिकारी आम जनता की तरह बसों और मेट्रो में सफर करेंगे, तो उन्हें जमीनी स्तर पर परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझने का मौका मिलेगा। साथ ही वे उस “वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर” का अनुभव भी कर पाएंगे, जिसका प्रचार सरकारें अक्सर करती हैं और जिसे आम नागरिक रोजाना उपयोग करते हैं।

पोस्ट में यह भी तर्क दिया गया है कि वीआईपी काफिलों में दर्जनों वाहनों के उपयोग से भारी मात्रा में पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। इसके अलावा सड़कें रोकने, ट्रैफिक बाधित होने और सुरक्षा व्यवस्था के कारण आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाए, तो इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इस सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि नेताओं और अधिकारियों को आम जनता की समस्याओं का वास्तविक अनुभव तभी होगा, जब वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। वहीं कुछ लोगों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे व्यवहारिक रूप से कठिन बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सीमित सुरक्षा के साथ सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, जिससे जनता और सरकार के बीच दूरी कम होती है। भारत में भी समय-समय पर नेताओं द्वारा मेट्रो या ट्रेन में सफर करने की तस्वीरें सामने आती रही हैं, लेकिन इसे नियमित व्यवस्था बनाने को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है।

वर्तमान में देश के कई बड़े शहरों में मेट्रो नेटवर्क और इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। सरकारें लगातार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात कर रही हैं, ताकि प्रदूषण और ईंधन खपत को कम किया जा सके। ऐसे में वायरल पोस्ट ने एक बार फिर वीआईपी संस्कृति, ईंधन बचत और जनसुविधाओं के वास्तविक उपयोग को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

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