कबीरधाम में गन्ने की नई उन्नत किस्मों का विस्तार, उत्पादन बढ़ाने कारखाना प्रबंधन की पहल

पंडरिया (कबीरधाम)। लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्या. पंडरिया द्वारा कारखाना क्षेत्र में गन्ने की घटती पैदावार को देखते हुए नई उन्नत किस्मों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले 7 से 8 वर्षों से क्षेत्र में एक ही गन्ना किस्म CO-085 का अधिक विस्तार होने तथा उसमें रोग लगने के कारण उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा था, जिससे किसानों की आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।

इस स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से कारखाना प्रबंधन ने क्षेत्र के किसानों को महाराष्ट्र स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, नागपुर एवं पुणे के गन्ना अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण कराया। वहां किसानों को नई उन्नत गन्ना किस्मों CO-92005, CO-86032 एवं VSI CO-18121 की खेती, उनकी उत्पादकता तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

इसी क्रम में कारखाना प्रबंधन द्वारा क्षेत्र सहायकों की एक टीम का गठन कर उन्हें महाराष्ट्र के सतारा जिले के पाडेगांव स्थित केन्द्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र भेजा गया। यहां टीम ने गन्ना वैज्ञानिक डॉ. दत्ताराय थोरवे से मुलाकात कर PDN-15012, PDN-15006 एवं PDN-13007 जैसी नई उन्नत गन्ना प्रजातियों की जानकारी प्राप्त की। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये तीनों किस्में कबीरधाम जिले की जलवायु और मिट्टी के लिए अत्यंत अनुकूल हैं तथा इनसे बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कारखाना प्रबंधन द्वारा अब क्षेत्र में नई किस्मों के विस्तार हेतु लगातार CO-92005, CO-86032 एवं VSI CO-18121 किस्मों को मंगाकर किसानों में वितरित किया जा रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के सांगली स्थित नर्सरी से PDN-15012, PDN-15006 एवं PDN-13007 किस्मों को मंगाकर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

कारखाना के क्षेत्र सहायकों द्वारा किसानों को आधुनिक गन्ना खेती तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। किसानों को पौधों के बीच 4 फीट की दूरी बनाए रखने, समय पर सिंचाई करने तथा निर्धारित मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र सहायकों द्वारा किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए नई किस्मों के सफल रोपण और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है।

कारखाना प्रबंधन को विश्वास है कि गन्ने की उन्नत एवं रोग प्रतिरोधक किस्मों के उपयोग से क्षेत्र में गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल शक्कर कारखाना को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है..

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