जानकीवन धाम में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे: पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल व विधायक भावना बोहरा ने की पूजा, प्रदेश की समृद्धि की कामना…
कुंआ-बिपतरा (छत्तीसगढ़)। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जानकीवन धाम में आयोजित भव्य शिव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा एवं महायज्ञ कार्यक्रम आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बन गया। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम में मंत्री एवं विधायक के आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं, आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों द्वारा भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

इस अवसर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा ही प्रदेश की असली पहचान है। जानकीवन धाम जैसे पवित्र स्थल न केवल श्रद्धा के केंद्र हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों के बीच एकता की भावना मजबूत होती है। मंत्री ने ग्रामवासियों से मिले स्नेह के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह मंदिर भविष्य में प्रदेश का प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र बनेगा।

वहीं पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने इस आयोजन को सनातन संस्कृति की गहराई और समाज की एकजुटता का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जानकीवन धाम में आयोजित यह महायज्ञ और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आयोजन समिति और समस्त ग्रामवासियों को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।

विधायक ने आगे कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और समाज में आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान यज्ञ-हवन, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और एकता का भी संदेश देने में सफल रहा।

