जुनवानी सहकारी समिति में खाद वितरण में गड़बड़ी का आरोप, किसानों ने की निष्पक्ष जांच की मांग,पढ़े पुरा समाचार…?
कबीरधाम/बोड़ला। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जुनवानी (जंगल) में वर्ष 2025-26 के दौरान खाद एवं बीज वितरण में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। समिति के कुछ किसानों ने समिति प्रबंधक पर वास्तविक वितरण से अधिक खाद की बोरियां उनके नाम पर दर्ज कर कंप्यूटर में कथित रूप से लोन एंट्री किए जाने का आरोप लगाया है। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उप आयुक्त, सहकारिता विभाग कबीरधाम को लिखित शिकायत सौंपी है।

किसानों ने प्रबंधक पर लगाए गंभीर आरोप
किसानों संतोष धुर्वे, रामचन्द्र, ईश्वर लाल, शिवकुमार, बसंती धुर्वे और बलीराम सहित अन्य शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जुनवानी (जंगल), पंजीयन क्रमांक 1401, विकासखंड बोड़ला में खाद वितरण के दौरान उनके नाम पर वास्तविक रूप से वितरित खाद की मात्रा से अधिक बोरियां कंप्यूटर रिकॉर्ड में दर्ज की गईं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उनके नाम पर जितनी खाद वास्तव में प्राप्त हुई, उससे अधिक मात्रा कंप्यूटर में दर्ज कर कथित तौर पर लोन एंट्री की गई। किसानों ने अपने दावे के समर्थन में खाद वितरण से संबंधित रसीद एवं पावती भी शिकायत के साथ संलग्न किए जाने की बात कही है।

वास्तविक खाद वितरण और कंप्यूटर रिकॉर्ड के मिलान की मांग
किसानों का कहना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाए तो समिति के खाद वितरण रजिस्टर, किसानों को जारी रसीद-पावती और कंप्यूटर में दर्ज लोन एंट्री के बीच अंतर सामने आ सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने सहकारिता विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं दस्तावेज आधारित जांच कराई जाए। इसके लिए किसानों के बैंक खातों, खाद वितरण रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, कंप्यूटर में दर्ज लोन एंट्री, संबंधित रसीद-पावती और समिति के अन्य अभिलेखों का मिलान कराने की मांग की गई है।

किसानों ने की दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग
शिकायत में किसानों ने कहा है कि जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही शिकायतकर्ताओं ने समिति प्रबंधक को पद से तत्काल हटाने की मांग भी की है।

किसानों ने उप आयुक्त, सहकारिता विभाग कबीरधाम से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही खाद वितरण एवं लोन एंट्री में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में समिति के अभिलेखों और संबंधित किसानों के दस्तावेजों का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है..


