कवर्धा: तीन-तीन नोटिस के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, तहसील और नगर पालिका के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

कवर्धा। जिला मुख्यालय स्थित छिरपानी कॉलोनी में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका परिषद और तहसील न्यायालय द्वारा लगातार नोटिस जारी किए जाने तथा अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद आज तक मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी आदेशों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, छिरपानी कॉलोनी के रहवासियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कॉलोनी में सड़क के लिए आरक्षित शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर मकान बना लिया गया है। इसके कारण कॉलोनी के लोगों को आवागमन में लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत के बाद मामला तहसील न्यायालय तक पहुंचा और इसकी सुनवाई शुरू हुई।

तहसीलदार ने दिए थे अतिक्रमण हटाने के आदेश

मामले की सुनवाई के बाद तहसीलदार न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर 30 जून 2026 को एक और नोटिस जारी किया गया, जिसमें 24 घंटे के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया।

नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समय सीमा में कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन बलपूर्वक अतिक्रमण हटाएगा तथा कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च संबंधित कब्जाधारियों से वसूला जाएगा।

नगर पालिका ने भी पहले ही जारी किया था नोटिस

तहसील न्यायालय की कार्रवाई से पहले नगर पालिका परिषद कवर्धा ने भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इसके बावजूद अब तक मौके पर अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

रहवासियों ने लगाए गंभीर आरोप

छिरपानी कॉलोनी के रहवासियों का आरोप है कि प्रशासन केवल नोटिस जारी करने तक सीमित है, जबकि धरातल पर कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उनका कहना है कि यदि तहसीलदार न्यायालय और नगर पालिका परिषद के आदेशों का भी पालन नहीं कराया जा रहा है, तो आम नागरिकों का कानून और प्रशासन पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।

रहवासियों के अनुसार, सड़क पर वर्षों से बने कथित अतिक्रमण के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही प्रकरण में नगर पालिका और तहसील न्यायालय दोनों के आदेश जारी होने के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह सरकारी आदेशों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय मौके पर पहुंचकर तत्काल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए, ताकि कॉलोनीवासियों को राहत मिल सके।

अब निगाहें प्रशासन पर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन-तीन नोटिस और स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया? क्या प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, या फिर कार्रवाई में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी हो रही है? इस मामले में अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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