भीषण गर्मी से आंगनबाड़ी के बच्चों का हाल बेहाल,बदहाल भवन और सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती, अभी तक विभाग कर क्या रहा है ?

कबीरधाम- जिले और राज्य मे पड़ रही गर्मी ने जनजीवन को बहुत प्रभावित किया है, तापमान रोजाना 44℅ सेल्शियस के पार पहुंच रही है,जिससे खासकर छोटे बच्चों के स्वास्थ पर बुरा असर देखने को मिल रहा है,जिले मे संचालित 1700 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रो मे नन्हें मुन्हे बच्चे चिलचिलाती धुप और गर्मी मे समय बिता रहे है,

 

कल हि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा स्कूली बच्चों का ग्रीष्मकालीन छुट्टी घोषित हुआ है पर आंगनबाड़ी मे पढ़ रहे नन्हें मुन्हे बच्चो का क्या होगा ?


वर्तमान मे आंगनबाड़ी केंद्रो का संचालन सुबह 7 बजे से 11 बजे तक किया जा रहा है जो इस भीषण गर्मी मे बच्चों के लिए घातक बनता जा रहा है, गर्मी इतनी बढ़ चुकी है कि घर मे बाहर निकलना ही मुश्किल होता जा रहा है, स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब जिले मे आज भी ऐसे कई आंगनबाड़ी भवन है जो किराये व जर्ज़र स्थिति मे संचालित किया जा रहा है जो कि बच्चों के लिए खतरे से कम नही है, अधिकांश केंद्रो मे तो ना बिजली की सुविधा है ना पिने की शुद्ध पानी की ना ही शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्था, ऐसे स्थिति मे बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ व सहायिकाओं को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, भीषण गर्मी को देखते हुए पालक अपने बच्चो को आंगनबाड़ी भेजना नही चाहते और अधिकारीगण कार्यकर्ताओ,सहायिकाओं को परेशान करते है,

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि आंगनबाड़ी मे साल मे 300 दिन पोषण आहार खिलाना जाना चाहिए, पर ऐसे स्थिति मे इस आदेश का पालन करते हुए भी बच्चों की सुविधा और स्वास्थ का ध्यान रखना एक बड़ी चुनौती बन गयी है,

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के द्वारा मांग की जा रही है कि इस भीषण गर्मी के मौसम मे केंद्रो के संचालन का समय सिमित किया जाए या फिर पोषण आहार घर घर जाकर वितरण किया जाए, इससे बच्चों को गर्मी से राहत मिल पाएगी और स्वास्थ सम्बन्धी जोखिम भी काफी कम होंगे,

निष्कर्ष-
कबीरधाम जिले मे भीषण गर्मी,बदहाल भवन और मुलभुत सुविधाओं की कमी ने महिला एवं बाल विकास विभाग (आंगनबाड़ी) के कमजोरियो का उजागर कर दिया है, अब देखना इस बात को है कि प्रशासन बच्चों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए केंद्रो के संचालन समय मे परिवर्तन करे या मुलभुत सुविधाओं को अच्छा करे जिससे नन्हें मुन्हे बच्चों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े ।

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