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Chhattisgarh: खूंखार माओवादी की मांद में बीआरओ बना रहा ऐसी सड़क,जिसे बनाने में ठेकेदारों की हिम्मत दे गई जवाब?

Chhattisgarh: खूंखार माओवादी की मांद में बीआरओ बना रहा ऐसी सड़क,जिसे बनाने में ठेकेदारों की हिम्मत दे गई जवाब?

 

छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल प्रभावित इलाके में सड़क बनाने के लिए सरकार की ओर से कई बार निविदा जारी की गईं। हर बार वह निविदा खाली ही चली गईं, दरअसल सड़क जिस इलाके में बननी थी, वह खूंखार नक्सल कमांडर हिड़मा के प्रभाव वाला क्षेत्र था। इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद बीआरओ सड़क बनाने पहुंचा है।

 

रायपुर: सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) बस्तर संभाग में खूंखार माओवादी कमांडर हिडमा की मांद में ऐसी सड़कें बनाने के लिए कदम रखा है, जिन्हें कोई भी ठेकेदार बनाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। एक अधिकारी ने इस मामले में जानकारी दी। उन्होंने कहा, बीआरओ लद्दाख और उत्तर-पूर्व के दुर्गम, पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क बनाने में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है और छत्तीसगढ़ शायद एकमात्र माओवादी प्रभावित राज्य है जहां इसे तैनात किया गया है।

 

दो सड़कें बनाएगा बीआरओ

फिलहाल बीआरओ की टीमों ने सोमवार को बीजापुर के सुदूर इलाके में काम शुरू किया। बता दें कि 2004-06 में, माओवादी हिंसा के दौरान, बीआरओ ने दंतेवाड़ा में जगदलपुर और गीदम के बीच 100 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया था। यह अभी भी बस्तर में सर्वश्रेष्ठ है। इस बार, बीआरओ बस्तर में माओवादी विद्रोह के सबसे अस्थिर केंद्र तक पहुंच गया है। यहां बीआरओ दो सड़कें बनाएगा, हिडमा के पुवर्ती गांव से सिलगेर तक और तर्रेम से कोंडापल्ली तक।

 

हिडमा का पैतृक गांव है पुवर्ती

पुवर्ती, हिडमा का पैतृक गांव है और तेकुलगुडा से बमुश्किल 2 किमी दूर है, जहां अप्रैल 2021 में माओवादी हमले में 23 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसके अलावा 17 मई, 2021 को पुलिस गोलीबारी में तीन ग्रामीणों के मारे जाने के बाद सिलगेर ही विरोध प्रदर्शन का स्थल था।

 

केंद्रीय गृहमंत्री का हस्तक्षेप और बीआरओ की एंट्री

स्थानीय ठेकेदार इन क्षेत्रों में प्रोजेक्ट शुरू करने से बहुत डर रहे थे। सरकार की ओर से जारी कई निविदाओं को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री ने हस्तक्षेप किया और बीआरओ को यह काम सौंपा गया। अधिकारियों ने इन सड़क मार्गों की डिटेल शेयर नहीं की है लेकिन उन्होंने कहा कि तर्रेम और कोंडापल्ली सड़क 18 किमी लंबी होगी और सिल्गेर से पुवार्ती तक 11 किमी लंबी होने की योजना है।

 

कब तक पूरी होंगी सड़कें

तर्रेम-कोंडापल्ली खंड के जून 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है और इसकी लागत लगभग 40 करोड़ रुपये होगी। बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने कहा, ‘मार्च 2026 तक माओवादियों को खत्म करने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को हासिल करने की दिशा में यह एक और कदम है।’

 

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About The Author

Raja Pawan Shrivastava

राजा श्रीवास्तव(फाउंडर & चीफ एडिटर) बीएजेएमसी (B.A.J.M.C) कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़.. खबर,विज्ञापन या अन्य खास अपडेट के लिए संपर्क करे - 📞7389167768☎️

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