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S.LOHARA BLOCK BREAKING- सहसपुर लोहारा में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बदहाल, बच्चों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ,पढ़े पुरा समाचार..?

S.LOHARA BLOCK BREAKING- The condition of Anganwadi centres in Sahaspur Lohara is bad, children are not getting full benefits, read the full news..?

सहसपुर लोहारा /कबीरधाम।   बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और समग्र विकास के उद्देश्य से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सहसपुर लोहारा क्षेत्र में गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। शासन द्वारा बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण व देखभाल के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में इन योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन बेहद कमजोर नजर आ रहा है।

जानकारी के अनुसार कई आंगनबाड़ी केंद्र बाहर से रंग-रोगन और साज-सज्जा के कारण आकर्षक दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर की वास्तविक स्थिति काफी खराब बताई जा रही है। बच्चों को न तो नियमित रूप से पोषण आहार मिल पा रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत से इतने अनजान क्यों हैं।

निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह कमजोर पड़ गई है।अब आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी कौन करेगा…?

परियोजना अधिकारी भी मुख्यालय से दूर

सूत्रों के अनुसार विकासखंड में पदस्थ परियोजना अधिकारी के बारे में भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि परियोजना अधिकारी विकासखंड मुख्यालय में रहने के बजाय जिला मुख्यालय में ही अपना मुख्यालय बनाए हुए हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है।

इसी तरह कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पदस्थ कार्यकर्ता भी अपने मुख्यालय में निवास नहीं कर रहीं। कुछ कार्यकर्ता विकासखंड या जिला मुख्यालय से आना-जाना करती हैं, जबकि कुछ मामलों में दूसरे जिलों से भी कार्यकर्ता आकर केंद्र संचालित कर रही हैं। इससे केंद्रों का संचालन नियमित रूप से नहीं हो पा रहा है।

जर्जर भवनों से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा

क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन भी जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं। कई भवनों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छतें भी टूटने की स्थिति में हैं। इसके बावजूद इन भवनों की मरम्मत या निरीक्षण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

ऐसे में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते इन भवनों की मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी समय दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

योजनाएं कागजों में सक्रिय, जमीनी स्तर पर असर कम

महिला एवं बाल विकास विभाग की कई योजनाएं कागजों में तो सक्रिय दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर लगभग नगण्य नजर आ रहा है। इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की गंभीरता से जांच कराई जाए। साथ ही जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही के दोषी पाए जाएं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो इसका सीधा नुकसान क्षेत्र के बच्चों के स्वास्थ्य और उनके भविष्य पर पड़ेगा। ऐसे में जरूरी है कि शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कदम उठाए ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं तक पहुंच सके।

अगर कोई अप्रिय घटना घट जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन रहेगा…?

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Raja Pawan Shrivastava

राजा श्रीवास्तव(फाउंडर & चीफ एडिटर) बीएजेएमसी (B.A.J.M.C) कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़.. खबर,विज्ञापन या अन्य खास अपडेट के लिए संपर्क करे - 📞7389167768☎️

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