कबीरधाम जिले को मिली नई कलेक्टर, तुलिका प्रजापति संभालेंगी जिले की कमान; गोपाल वर्मा को रायपुर में नई जिम्मेदारी
कवर्धा/कबीरधाम, 19 अगस्त 2026। कबीरधाम जिले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध प्रशासनिक आदेश/रिपोर्ट के अनुसार अंबागढ़ चौकी की कलेक्टर तुलिका प्रजापति को कबीरधाम जिले की नई कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं कबीरधाम के वर्तमान कलेक्टर गोपाल वर्मा को संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, रायपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब तुलिका प्रजापति कबीरधाम जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की कमान संभालेंगी। उनके सामने जिले में शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ विकास कार्यों को गति देने और आम जनता से जुड़े मुद्दों के त्वरित निराकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

तुलिका प्रजापति के सामने होंगी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां
कबीरधाम जिला भौगोलिक एवं सामाजिक दृष्टि से विविधताओं वाला क्षेत्र है। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना प्रशासन के प्रमुख दायित्वों में शामिल है।
नई कलेक्टर के सामने जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, योजनाओं की प्रगति, राजस्व मामलों के निराकरण, कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक समन्वय तथा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने जैसी प्राथमिकताएं रहेंगी।

गोपाल वर्मा को रायपुर में नई जिम्मेदारी
कबीरधाम के वर्तमान कलेक्टर गोपाल वर्मा को प्रशासनिक फेरबदल के तहत संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, रायपुर की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी है। नई जिम्मेदारी के साथ अब वे राज्य स्तर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
गोपाल वर्मा के स्थानांतरण के बाद कबीरधाम जिले में प्रशासनिक नेतृत्व का दायित्व तुलिका प्रजापति को सौंपे जाने की बात सामने आई है।
विकास कार्यों और जनसमस्याओं पर रहेगी नजर
कबीरधाम जिले में नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ लोगों की नजर अब नई कलेक्टर तुलिका प्रजापति की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर रहेगी। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लंबित जनसमस्याओं, राजस्व प्रकरणों, ग्रामीण विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद रहेगी।
विशेष रूप से ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा विकास परियोजनाओं की गति पर प्रशासन का फोकस महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


