रेंगाखारकला में गरीब महिला की जमीन के नामांतरण पर विवाद, पटवारी पर मिलीभगत का आरोप; तहसील कार्यालय में बार-बार आवेदन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा,पढ़े पुरा समाचार…
रेंगाखार कला/कबीरधाम, 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)। कबीरधाम जिले के रेंगाखार कला तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मिनमिनया जंगल के ग्राम तेली टोला से जमीन के नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड में कथित तौर पर किए गए बदलाव का मामला सामने आया है। यहां रहने वाली गरीब महिला शांति बाई साहू ने अपनी करीब 1 एकड़ 40 डिसमिल जमीन के राजस्व अभिलेखों में नाम परिवर्तन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

शांति बाई साहू का आरोप है कि उनके पिता को वर्ष 1991 में संबंधित भूमि का पट्टा प्राप्त हुआ था। पिता के निधन के बाद राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज हुआ था। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रोजगार के सिलसिले में गांव से बाहर रहने के दौरान कथित रूप से जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया गया।

महिला के अनुसार, उनकी भूमि पर अधिकार होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड से उनका नाम हटाकर गांव के ही घनश्याम पिता नरबद का नाम दर्ज कर दिया गया। शांति बाई ने इस प्रक्रिया में पूर्व संबंधित पटवारी राडेकर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मिलीभगत का आरोप लगाया है।
1.40 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड को लेकर उठे सवाल
पीड़िता के मुताबिक विवादित भूमि खसरा नंबर 1/9, 52/4 एवं 58/15 से संबंधित है। इन खसरों का कुल रकबा करीब 1 एकड़ 40 डिसमिल बताया गया है।

शांति बाई का कहना है कि यह जमीन उनके परिवार को पूर्व में पट्टे के रूप में मिली थी। पिता की मृत्यु के बाद राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हुआ था। ऐसे में बाद में किस आधार पर उनका नाम हटाकर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया, यह पूरे मामले का अहम सवाल है।

महिला का आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति और आर्थिक कमजोरी का कथित रूप से फायदा उठाकर भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में परिवर्तन किया गया। उन्होंने प्रशासन से पुराने दस्तावेजों और वर्तमान राजस्व अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीकृत नहीं होने का दावा
शांति बाई साहू ने अपने आवेदन में यह भी दावा किया है कि विवादित भूमि से संबंधित जिस दस्तावेज के आधार पर नाम परिवर्तन किया गया, उसका पंजीयन कार्यालय में विधिवत पंजीयन नहीं हुआ है।
पीड़िता का सवाल है कि यदि संबंधित दस्तावेज का विधिवत पंजीयन नहीं हुआ था, तो फिर राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम हटाकर दूसरे व्यक्ति का नाम किस आधार पर दर्ज किया गया।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नामांतरण प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज, आदेश, आवेदन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
तहसील कार्यालय में कई बार आवेदन देने का दावा
शांति बाई साहू का कहना है कि उन्होंने अपने जमीन संबंधी मामले को लेकर तहसील कार्यालय रेंगाखार कला में कई बार आवेदन प्रस्तुत किया है, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से वह बेहद परेशान हैं।

पीड़िता के अनुसार, बार-बार आवेदन देने के बावजूद मामले का समाधान नहीं होने से उन्हें अपनी जमीन के अधिकार को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने में भी उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके पुराने आवेदनों और वर्तमान शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
वर्ष 1991 के पट्टे से वर्तमान रिकॉर्ड तक जांच की मांग
शांति बाई ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी है कि वर्ष 1991 में जारी भूमि पट्टे से लेकर वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड तक सभी दस्तावेजों की क्रमवार जांच की जाए।
उनकी मांग है कि यह पता लगाया जाए कि—
* मूल रूप से भूमि का पट्टा किसके नाम जारी हुआ था।
* पिता की मृत्यु के बाद राजस्व रिकॉर्ड में किस आधार पर उनका नाम दर्ज हुआ।
* बाद में उनका नाम किस आदेश या दस्तावेज के आधार पर हटाया गया।
* घनश्याम पिता नरबद का नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया।
* नामांतरण के दौरान संबंधित दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था या नहीं।
* नामांतरण प्रक्रिया में राजस्व नियमों का पालन किया गया या नहीं।
* संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका क्या रही।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो महिला ने संबंधित रिकॉर्ड को नियमानुसार दुरुस्त कर उनका वैध अधिकार बहाल करने की मांग की है।
गरीब महिला ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
शांति बाई साहू का कहना है कि जमीन उनके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह अपने अधिकार की लड़ाई प्रभावी तरीके से नहीं लड़ पा रही हैं। ऐसे में उन्होंने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है।
महिला का कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गलती या नियम विरुद्ध नामांतरण हुआ है तो उसे सुधारा जाना चाहिए, ताकि उन्हें उनकी जमीन के संबंध में न्याय मिल सके।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
मामला तहसील कार्यालय तक पहुंचने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन किस आधार पर किया गया था और संबंधित प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
यदि प्रशासन पुराने पट्टे, नामांतरण प्रकरण, पंजीयन दस्तावेज और राजस्व अभिलेखों की जांच करता है तो मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
📰 खबरी बाबु न्यूज़
समाचार एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करें:
📞 7389167001 | 7389167768
हर खबर आप तक — आपकी आवाज़, हमारी पहचान।


