Chhattisgarh बजट 2026-27 पर सियासी घमासान,नेता प्रतिपक्ष Dr.Charandas Mahant का आरोप – “यह संकल्प नहीं, भ्रष्टाचार का बजट”
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री OP Choudhary ने सोमवार को सदन में ‘SANKALP’ थीम पर आधारित 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। बजट पेश होते ही सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बजट “गति” का नहीं बल्कि “दुर्गति” का बजट है। उनके मुताबिक सरकार ने बड़े-बड़े शब्दों और नारों के जरिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।

“नई योजनाएं, भ्रष्टाचार के नए रास्ते”
महंत ने आरोप लगाया कि बजट में घोषित नई योजनाएं विकास के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोलने के लिए लाई गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकल्प और विकास का जो दावा किया है, वह केवल कागजों तक सीमित है।
उन्होंने कहा, “यह संकल्प का नहीं, भ्रष्टाचार का बजट है। शब्दों का मायाजाल बुनकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।”
युवाओं और महिलाओं की अनदेखी का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि बजट में प्रदेश के युवाओं के लिए ठोस रोजगार नीति का अभाव है। उन्होंने कहा कि नौकरी के नाम पर युवाओं को “झुनझुना” थमा दिया गया है।
महिलाओं के लिए भी कोई प्रभावी योजना नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बजट में उनके सशक्तिकरण के लिए ठोस प्रावधान नजर नहीं आते।
हड़ताली कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया
डॉ. महंत ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों की मांगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगें छोटी-छोटी और जायज हैं, लेकिन सरकार उन्हें पूरा करने में भी असमर्थ साबित हो रही है। इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।
सरकार की ओर से बचाव की तैयारी
हालांकि, सत्तापक्ष का कहना है कि यह बजट राज्य के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, कृषि, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र को मजबूती देने वाला है। सरकार का दावा है कि ‘SANKALP’ थीम के तहत यह बजट प्रदेश को नई दिशा देगा।
बजट पर आगामी दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर बहस तेज होने के आसार हैं। विपक्ष जहां इसे जनविरोधी और दिशाहीन बता रहा है, वहीं सरकार इसे विकास और विश्वास का बजट करार दे रही है।

