समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने जिला ग्रंथालय कवर्धा में पालक उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित,गृह आधारित शिक्षा प्राप्त कर रहे दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास में पालकों की भूमिका पर दिया गया विशेष बल…

कवर्धा। समावेशी शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन तथा गृह आधारित शिक्षा प्राप्त कर रहे दिव्यांग बच्चों के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला ग्रंथालय कवर्धा में एक दिवसीय पालक उन्मुखीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में पालकों एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर गोपाल वर्मा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय पोयाम के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा एवं जिला मिशन समन्वयक विनोद श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में इसका संचालन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के पालकों को समावेशी शिक्षा, गृह आधारित शिक्षा की प्रक्रिया, बच्चों के अधिकारों तथा शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न शैक्षणिक सुविधाओं एवं योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला मिशन समन्वयक विनोद श्रीवास्तव द्वारा पालकों के स्वागत एवं अभिनंदन से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों के समुचित विकास में पालकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने पालकों को शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विकासखंड स्तर पर पदस्थ बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से संबंधित सभी प्रकार की सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की आवश्यकता या समस्या होने पर वे बीआरपी से संपर्क कर सकते हैं।
इस अवसर पर सहायक परियोजना समन्वयक (समावेशी शिक्षा) कबीरधाम के एपीसी राकेश चंद्रवंशी, बीआरसी केशलाल साहू, सहायक परियोजना समन्वयक राजू चंद्रवंशी एवं राजेश कौशिक विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कबीरधाम जिला के विकासखंड पंडरिया, बोडला, कवर्धा एवं लोहारा से आए पालकों एवं अभिभावकों ने सक्रिय सहभागिता की।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान बीआरसी विनोद गोस्वामी, नरेश सोनी, होमबाई साहू, गायत्री साहू एवं रेशमा मेश्राम द्वारा समावेशी शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने दिव्यांगता के 21 प्रकारों के बारे में बताते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षकों ने पालकों को घर में सहयोगात्मक एवं सकारात्मक वातावरण निर्मित करने, बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि परिवार एवं विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।
कार्यक्रम के दौरान पालकों ने अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं भी साझा कीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। इस संवादात्मक सत्र से पालकों को बच्चों की शिक्षा, अधिकारों एवं उपलब्ध संसाधनों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पालकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा एवं विकास में बेहतर सहयोग करने की प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम समावेशी शिक्षा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता तथा दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




