कवर्धा में 56 दिन बाद खुला सनसनीखेज हत्याकांड का राज, नाबालिग ने की थी डांस शिक्षक की हत्या,ब्लैकमेलिंग से तंग आकर चाकू से गला रेतकर की हत्या, तकनीकी जांच और 500 CCTV फुटेज से पुलिस को मिली सफलता..
कवर्धा, 16 मार्च। जिला कबीरधाम में करीब दो महीने पहले हुए चर्चित सत्यमदास मानिकपुरी हत्याकांड का आखिरकार पुलिस ने खुलासा कर दिया है। लगभग 56 दिनों तक चली गहन जांच, तकनीकी विश्लेषण और सैकड़ों लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। मामले में एक विधि से संघर्षरत नाबालिग बालक को अभिरक्षा में लिया गया है, जिसने पूछताछ में हत्या करना स्वीकार किया है।
पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला ब्लैकमेलिंग और विवादित संबंधों से जुड़ा हुआ था। मृतक द्वारा बार-बार ब्लैकमेल किए जाने से परेशान होकर नाबालिग ने योजना बनाकर उसकी हत्या कर दी।
17 जनवरी को मिला था युवक का शव
जानकारी के अनुसार 17 जनवरी 2026 को थाना कवर्धा क्षेत्र के लालपुर नर्सरी के पीछे सड़क पर एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि युवक के गले पर चाकू से वार कर उसकी हत्या की गई थी।
बाद में मृतक की पहचान सत्यमदास मानिकपुरी (27 वर्ष) निवासी वार्ड नंबर 26, घोठिया रोड कवर्धा के रूप में हुई। वह पेशे से डांस शिक्षक था और पांडातराई क्षेत्र के एक निजी स्कूल में बच्चों को डांस सिखाता था। मामले में थाना कवर्धा में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चली जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक की निगरानी में जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक कबीरधाम के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी और उप पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने लगातार 56 दिनों तक इस मामले की सूक्ष्म और गहन जांच की।
50 हजार मोबाइल नंबर और 500 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी स्तर पर व्यापक पड़ताल की। करीब 50 हजार मोबाइल नंबरों के कॉल डाटा का विश्लेषण किया गया और 500 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज विभिन्न स्थानों से एकत्र कर उनका बारीकी से परीक्षण किया गया। घटनास्थल के आसपास के मार्गों और संभावित आवागमन के रास्तों की फुटेज लगातार खंगाली गई।
इसके अलावा मृतक के दोस्तों, परिचितों और आसपास रहने वाले 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। साथ ही क्षेत्र के 40-50 संदिग्धों और पूर्व अपराधियों से भी थाने में पूछताछ की गई।
सोशल मीडिया जांच से मिला अहम सुराग
विवेचना के दौरान पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और एथिकल हैकिंग तकनीकों की मदद से मृतक के इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी जांच की। डिजिटल गतिविधियों और मैसेज के विश्लेषण से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे जांच की दिशा बदल गई।
तीन महीने से था संपर्क, बाद में शुरू हुआ विवाद

जांच में सामने आया कि मृतक और नाबालिग बालक के बीच लगभग तीन महीने पहले से जान-पहचान थी। इस दौरान दोनों के बीच अप्राकृतिक संबंध भी बने थे। बाद में इस संबंध को लेकर विवाद हो गया और मृतक नाबालिग को बार-बार संबंध बनाने के लिए ब्लैकमेल करने लगा।
लगातार ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर नाबालिग ने हत्या की योजना बना ली।
व्हाट्सएप कॉल से बुलाया और कर दी हत्या
पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि घटना वाले दिन उसने मृतक को व्हाट्सएप कॉल कर अपने पास बुलाया। इसके बाद दोनों स्कूटी से घटनास्थल की ओर गए। नाबालिग अपने घर से पहले ही चाकू लेकर निकला था।
लालपुर नर्सरी के पास पहुंचते ही उसने अचानक मृतक के गले पर चाकू से वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद आरोपी ने मृतक का मोबाइल और सिम अलग-अलग स्थानों पर नदी में फेंक दिए। पुलिस ने नाबालिग को घटनास्थल पर ले जाकर घटना का सीन रिक्रिएट कराया और उसकी निशानदेही पर नदी से मृतक का मोबाइल फोन बरामद कर लिया। सिम कार्ड की तलाश अभी जारी है।
इसके अलावा आरोपी के कब्जे से घटना में उपयोग की गई स्कूटी जब्त की गई है। नाबालिग ने खून से सने कपड़े अपने पैतृक गांव में छिपा दिए थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया। घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू पहले ही पुलिस के कब्जे में है।
मोबाइल सर्च हिस्ट्री ने भी खोले राज
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन की सर्च हिस्ट्री भी खंगाली गई। इसमें सामने आया कि वह इंटरनेट पर अपराध के बाद बचने के तरीके, मोबाइल ट्रैकिंग से बचाव, मनोविज्ञान, डर के पैटर्न, सोशल मीडिया प्रभाव, साउंड प्रूफ कमरे, मानसिक तनाव, सेल्फ हार्म जैसे विषयों पर लगातार सर्च करता रहा था।
इन सभी तथ्यों को गवाहों के सामने मोबाइल परीक्षण के दौरान दर्ज कर पंचनामा तैयार किया गया।
10 हजार रुपये के इनाम की थी घोषणा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपी के संबंध में जानकारी देने वाले को 10 हजार रुपये नगद इनाम देने की घोषणा भी की गई थी।
कई पुलिसकर्मियों की टीम ने किया खुलासा
इस जटिल हत्याकांड को सुलझाने में थाना कोतवाली, साइबर थाना और विशेष टीम के दर्जनों पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लगातार तकनीकी विश्लेषण, पूछताछ और साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस ने आखिरकार इस सनसनीखेज हत्या की गुत्थी सुलझा ली।
पुलिस ने नाबालिग आरोपी को विधिवत अभिरक्षा में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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