विधानसभा में धर्मांतरण विधेयक पर विधायक भावना बोहरा का ओजस्वी संबोधन, आदिवासी अस्मिता की रक्षा का बताया ‘महाकाव्य’….
रायपुर/पंडरिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने एक प्रभावशाली और भावनात्मक भाषण देते हुए विधेयक का प्रबल समर्थन किया। उन्होंने इसे आदिवासी समाज की “मूल जड़ों की रक्षा का महाकाव्य” बताते हुए इसकी आवश्यकता, प्रासंगिकता और सामाजिक प्रभावों को विस्तार से सदन के सामने रखा।
आदिवासी अस्मिता और संस्कृति पर जोर
विधायक बोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि यह विधेयक केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सभ्यता, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि वर्षों से बाहरी ताकतों द्वारा गरीबी, बीमारी और संसाधनों की कमी का लाभ उठाकर धर्मांतरण कराया जाता रहा है, जो आदिवासी समाज के मूल स्वरूप पर गहरा आघात है।
उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल का श्रेय राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “दृढ़ संकल्प” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” के विजन को दिया।
‘घर वापसी’ के अनुभव साझा
विधायक बोहरा ने पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में अपने द्वारा कराए गए 400 से अधिक आदिवासी परिवारों की “घर वापसी” के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कुल्हीडोंगरी, नेऊर और कुई-कुकदुर जैसे वनांचल क्षेत्रों में उन्होंने स्वयं जाकर लोगों के पैर पखारकर उन्हें उनके मूल धर्म से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना है। उनके अनुसार, धर्मांतरण “हृदय परिवर्तन” नहीं बल्कि मजबूरी और शोषण का परिणाम होता है, जबकि “घर वापसी” अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने की प्रक्रिया है।
विधेयक के प्रावधानों की सराहना
विधायक बोहरा ने विधेयक के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा कि:
• डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में लाना एक बड़ा कदम है।
• पैतृक धर्म में वापसी (घर वापसी) को धर्मांतरण की श्रेणी से बाहर रखना सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय है।
• महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जनजाति के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान कानून को प्रभावी बनाएगा।
• सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास और भारी जुर्माना सख्त संदेश देता है।
सुझाव और मांगें
विधायक बोहरा ने अन्य राज्यों की तर्ज पर कानून को और मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए, जिनमें शामिल हैं:
• जादू-टोना और अंधविश्वास के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को भी अपराध की श्रेणी में लाना
• चंगाई सभाओं और विदेशी फंडिंग पर कड़ी निगरानी
• दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान
• पीड़ित की परिभाषा को आदिवासी समाज के अनुरूप बनाना
• “घर वापसी” प्रक्रिया को प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्त रखना
ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख
अपने संबोधन में उन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ संघर्ष के इतिहास का उल्लेख करते हुए स्व. दिलीप सिंह जूदेव को याद किया और उनके योगदान को प्रेरणास्रोत बताया।
प्रश्नकाल में उठाए स्थानीय मुद्दे
सदन में प्रश्नकाल के दौरान विधायक बोहरा ने पंडरिया क्षेत्र के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए, जिनमें प्रमुख हैं:
• बाजार चारभाठा और पांडातराई में औद्योगिक संस्थानों की स्थापना
• कबीरधाम जिले में मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों की स्थिति
• बिहान योजना के तहत महिला स्व सहायता समूहों को ऋण सुविधा
• जिले में “महतारी सदन” की स्थापना और निर्माण
निष्कर्ष
अपने संबोधन के अंत में विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए खींची गई “लक्ष्मण रेखा” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी भी प्रकार की जबरन या प्रलोभन आधारित धर्मांतरण गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार आदिवासी समाज के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


