IMPORTANT NEWS- पत्रकारो से सूत्र पूछने का पुलिस को कोई अधिकार नही- सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

सूत्रों के हिसाब से खबर लिखने वाले पत्रकारो के लिए यह अच्छी खबर है, सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से पुलिस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा है, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड की बेंच ने पुलिस को भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 और 22 की याद दिलाई है,

चीफ जस्टिस ने कहा कि पत्रकारो की मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार से उनकी खबरों के लिए सूत्र नही पूछ सकती है, यहां तक कि कोर्ट भी उन्हे ऐसा करने के लिए बाध्य भी नही कर सकता,

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि आजकल यह देखने को मिल रहा है कि बिना किसी ठोस सबूत और बिना जांच में पत्रकारों के खिलाफ मुक़दमे दर्ज कर लिए जाते है और उन्हे फसाया जाता है, श्रेष्ठ बनने के चक्कर में पुलिस पत्रकारो के स्वतंत्रता का हनन कर रही है,

सूत्रों के हवाले से चलने वाली खबरो के कई मामले कोर्ट में जा चुके है, कोर्ट ने पत्रकारों से खबरों के सूत्र बताने का आदेश भी दे चुके है लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के इस फैसले के बाद मिडिया जगत में काफी उत्साह है, जानकारी के लिए बता दे कि हमारे देश में किसी भी विशेष कानून के जरिये पत्रकारों को अधिकार हासिल नही है, पत्रकारो के लिए अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार बाकी नागरिकों की तरह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के अंतर्गत ही मिले हुए है,

 

पत्रकारो को अपने सूत्र को गोपनीय रखने का अधिकार प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया एक्ट 1978 के तहत मिला हुआ है, इसमे 15(2) सेक्शन में साफ तौर पर लिखा हुआ है कि किसी भी पत्रकार को खबरों का सूत्र की जानकारी के लिए कोई बाध्य नही कर सकता।

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