छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का फैसला: ‘प्राइवेट पार्ट को छूने मात्र से दुष्कर्म (R*PE) सिद्ध नहीं’पढ़े पूरा समाचार…?

बिलासपुर, 24 फरवरी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि किसी महिला के निजी अंग को छूना मात्र, बिना यौन संबंध (संभोग) के, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दुष्कर्म (Rape) की परिभाषा में स्वतः नहीं आता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर उचित धाराएं तय की जानी चाहिए।
क्या था मामला?
मामला एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर जबरन छेड़छाड़ और दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। निचली अदालत ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धारा के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। हालांकि, उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ‘यौन संबंध स्थापित होने’ के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
अदालत की टिप्पणी
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में दुष्कर्म की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। यदि अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर पाता कि आरोपी द्वारा शारीरिक संबंध (Penetration) स्थापित किया गया, तो केवल स्पर्श या अश्लील हरकत को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसे छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न या अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है, लेकिन हर मामले में धारा 376 स्वतः लागू नहीं होगी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामलों में कानूनी परिभाषा को स्पष्ट करता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आरोपों के अनुरूप ही धाराएं लगाई जाएं और साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़े।
सामाजिक प्रतिक्रिया
फैसले के बाद सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का कहना है कि इससे कानून की व्याख्या स्पष्ट हुई है, जबकि अन्य इसे महिलाओं की सुरक्षा के संदर्भ में संवेदनशील विषय मान रहे हैं।
क्या है आगे की प्रक्रिया?
मामले में यदि राज्य सरकार चाहे तो वह उच्चतम न्यायालय में अपील दायर कर सकती है। फिलहाल, उच्च न्यायालय के इस फैसले को प्रदेश में एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर के रूप में देखा जा रहा है।
नोट: कानून के तहत किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न दंडनीय अपराध है। अदालत ने केवल दुष्कर्म की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट किया है, न कि ऐसे कृत्यों को वैध ठहराया है।




