चंद्रग्रहण के साए में होली: 2 मार्च को होलिका दहन, 4 मार्च को रंगोत्सव,खगोलीय संयोग से बदला पर्व का क्रम, बाजारों में बढ़ी रौनक,पढ़े पूरा समाचार..?
Holi under the shadow of lunar eclipse: Holika Dahan on March 2, Rangotsav on March 4, the order of the festival changed due to astronomical coincidence, markets became lively, read the full news..?

कबीरधाम (छत्तीसगढ़)। इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण होली का पर्व विशेष खगोलीय संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को है, किंतु उसी दिन चंद्रग्रहण लगने से होलिका दहन एक दिन पहले 2 मार्च को किया जाएगा। वहीं रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। इस प्रकार इस बार होलिका दहन और धुलेंडी (रंग पर्व) के बीच एक दिन का अंतर रहेगा।
ग्रहण के कारण बदला दहन का समय
परंपरागत रूप से फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन किया जाता है, लेकिन 3 मार्च को शाम 6:07 बजे से 6:50 बजे तक चंद्रग्रहण लगने के कारण उसी दिन दहन करना शुभ नहीं माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, अतः उसी दिन निर्धारित शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा।
हालांकि 2 मार्च की रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक भद्रा काल रहेगा। भद्रा में होलिका दहन वर्जित माना गया है, इसलिए श्रद्धालुओं को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में ही दहन करने की सलाह दी गई है।
होलाष्टक और सूतक का प्रभाव
पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ हो चुका है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक एवं शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार होलिका दहन से लगभग आठ घंटे पूर्व सूतक काल प्रभावी हो जाता है। सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते। होलिका दहन के अगले दिन प्रातः स्नान के बाद पूजा-अर्चना का विधान है।
तिथियां एक नजर में
• 2 मार्च – होलिका दहन
• 3 मार्च – चंद्रग्रहण
• 4 मार्च – रंगोत्सव (धुलेंडी)
बाजारों में बढ़ी रौनक, हर्बल रंगों की मांग
चंद्रग्रहण के साए के बावजूद होली की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जारी हैं। कबीरधाम के बाजारों में अस्थायी दुकानों पर रंग, गुलाल, पिचकारियां और नगाड़े सज चुके हैं। इस बार सिंथेटिक रंगों के साथ हर्बल गुलाल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
व्यापारियों के अनुसार सामान्य गुलाल 10 से 120 रुपये प्रति पैकेट तक बिक रहा है, जबकि हर्बल गुलाल 40 से 250 रुपये तक उपलब्ध है। बच्चों के लिए छोटी पिचकारी 30 से 300 रुपये तक मिल रही है। टैंक और प्रेशर वाली बड़ी पिचकारियों की कीमत 400 से 900 रुपये तक है। कार्टून कैरेक्टर वाली पिचकारियां बच्चों की पहली पसंद बनी हुई हैं।
नगाड़ों की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। छोटे नगाड़े 200 से 3000 रुपये तक बिक रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से भी ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं और कई स्थानों पर अग्रिम बुकिंग हो चुकी है। व्यापारियों को इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
प्रशासन की सतर्कता, शांति की अपील
त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाने के लिए प्रशासन भी सतर्क है। सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई गई है।
इस बीच खबरी बाबु न्यूज़ चैनल ने भी जिलेवासियों से अपील की है कि होली के पर्व को भाईचारे और प्रेम के साथ मनाएं। चैनल की ओर से कहा गया है कि त्योहार के नाम पर हुड़दंग, जबरदस्ती रंग डालना या नशे में उपद्रव करना उचित नहीं है। सभी नागरिक सामाजिक मर्यादा का पालन करें और शांति से होली खेलें।
विशेष महत्व की होली
इस वर्ष होली का पर्व खगोलीय संयोग के कारण विशेष महत्व रखता है। एक ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में होलिका दहन की तैयारी है, तो दूसरी ओर बाजारों की चहल-पहल त्योहार के उत्साह को और बढ़ा रही है।
कुल मिलाकर चंद्रग्रहण के साए के बावजूद रंगों का यह पर्व पूरे उल्लास, आस्था और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाए जाने को तैयार है।




