किराये के घर में रह रहे पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छोड़ा छत्तीसगढ़,पढ़े पूरा समाचार औऱ जानिए क्या है मामला ?

सुकमा/मलकानगिरी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पांच बार के विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा इन दिनों अपने राज्य से दूर ओडिशा के मलकानगिरी जिले में किराये के मकान में रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें जांच लंबित रहने तक छत्तीसगढ़ से बाहर रहने को कहा गया है। जेल से रिहाई के बाद उन्होंने मलकानगिरी को अपना अस्थायी ठिकाना बनाया है।
सुप्रीम कोर्ट की शर्त पर मिली जमानत
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस द्वारा दर्ज दो अलग-अलग कथित शराब घोटाले के मामलों में कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी। जमानत देते समय अदालत ने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी—जांच पूरी होने तक वे छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे।
ईडी ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। वे तब से न्यायिक हिरासत में थे। 4 फरवरी को रायपुर सेंट्रल जेल से उनकी रिहाई हुई।
मलकानगिरी में बना अस्थायी निवास
रिहाई के बाद कवासी लखमा ने ओडिशा के मलकानगिरी जिले की रिक्लेमेशन कॉलोनी में किराये का मकान लिया है। कोंटा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके वहां पहुंचने पर स्वागत किया। स्थानीय कांग्रेस नेता श्रीनिवास राव ने बताया कि उनके रहने की व्यवस्था यहीं की गई है।
मलकानगिरी क्यों चुना?
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने मलकानगिरी को ही रहने के लिए क्यों चुना, तो कवासी लखमा ने कहा:
“सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मुझे राज्य से बाहर रहना है। मलकानगिरी की भाषा, संस्कृति, परंपरा और खान-पान बस्तर क्षेत्र से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए मैंने यहां रहना उचित समझा।”
मलकानगिरी, बस्तर के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है और दोनों इलाकों में आदिवासी संस्कृति, बोली और जीवनशैली में काफी समानता है।
पांच बार के विधायक, बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता
कवासी लखमा कोंटा विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं और बस्तर अंचल में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। वे कांग्रेस के प्रमुख आदिवासी चेहरों में गिने जाते हैं।
आबकारी मंत्री रहते सामने आया था शराब घोटाला
साल 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने थे और कवासी लखमा को आबकारी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी कार्यकाल के दौरान राज्य में कथित शराब घोटाले का मामला सामने आया, जिसकी जांच ईडी कर रही है। आरोप है कि शराब नीति और वितरण से जुड़े फैसलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
राजनीति से दूर, पर कार्यकर्ताओं से संपर्क जारी
राज्य से बाहर रहने की शर्त के बावजूद कवासी लखमा अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए हुए हैं। कोंटा और बस्तर क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ता उनसे मिलने मलकानगिरी पहुंच रहे हैं।
आगे क्या?
अब यह देखना अहम होगा कि जांच की दिशा क्या रहती है और अदालत में मामले की सुनवाई किस मोड़ पर पहुंचती है। फिलहाल, एक समय प्रदेश की सत्ता में अहम भूमिका निभाने वाले नेता को अदालत के आदेश पर अपने राज्य से बाहर किराये के घर में रहना पड़ रहा है—जो छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक असामान्य और चर्चित घटनाक्रम बन गया है।




