मां शीतला मंदिर स.लोहारा के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव (द्वितीय वर्ष) के अवसर पर श्रीमद देवी भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब

सहसपुर लोहारा। मां शीतला मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उत्सव (द्वितीय वर्ष) के पावन अवसर पर मां शीतला मंदिर विकास समिति, सहसपुर लोहारा एवं समस्त नगरवासियों के सहयोग से शीतला मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और दूर-दूर से आए श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते दिखाई दिए।


कथा के तीसरे दिन कथा व्यास दंडी स्वामी विशुद्धानंद जी महाराज (काशी विश्वनाथ) ने देवी के लौकिक एवं अलौकिक स्वरूप तथा आदिशक्ति मां की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि देवी भागवत कथा का श्रवण मात्र मनुष्य को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्त कर देता है और जीवन में सद्बुद्धि, शांति तथा धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।


स्वामी जी ने मधु-कैटभ राक्षसों के वध के पश्चात की दिव्य कथा का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार देवताओं ने अम्बा यज्ञ का आयोजन किया। इसी दौरान एक स्वचालित पुष्पक विमान प्रकट हुआ, जिसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ब्रह्मलोक, शिवलोक और बैकुंठ से होते हुए अमृत सागर के समीप स्थित मणिद्वीप तक पहुंचाया। मणिद्वीप में देवों को मां भुवनेश्वरी के दिव्य दर्शन हुए। मां ने त्रिशक्ति—काली, लक्ष्मी और सरस्वती—के रूप में प्रकट होकर सृष्टि के भेदन का ज्ञान प्रदान किया।

इसके पश्चात देवताओं ने लौटकर देवियों के साथ अम्बा यज्ञ का पुनः आयोजन किया, जिसमें अरूणी मंथन से अग्नि का प्राकट्य हुआ। स्वामी जी ने आगे सत्यव्रत ब्राह्मण की प्रेरणादायक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कौशल देश में देवदत्त के पुत्र को उसकी मूर्खता के कारण त्याग दिया गया था। वह बालक गंगा तट पर माता सरस्वती की आराधना में लीन हो गया और केवल सत्य बोलने का व्रत धारण किया। देवी कृपा से उसे दिव्य बुद्धि प्राप्त हुई और वह महान ज्ञानी, सत्यवादी ऋषि के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। यह कथा सत्य, तप और भक्ति की महिमा को दर्शाती है।

कार्यक्रम में आयोजक मंडल के सुजीत पांडे सहआचार्य, जयकरणलाल एवं सीमा श्रीवास्तव परीक्षित के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही प्रदीप वर्मा, राधे किशन, हेमंत साहू, सुभाष जायसवाल सोनी, विष्णु निषाद, यशवंत नागराज, मनहरण श्रीवास, अनिल श्रीवास्तव, अनिल मिश्रा, गणेश श्रीवास, डाकेश्वर श्रीवास, मोहन निषाद, लेखराम डडसेना, राजेश प्रसाद मिश्रा, अतुल दुबे, गुलजारी मांडवी, सौरभ श्रीवास्तव, दिवाकर डडसेना, सतीश विश्वकर्मा, विनोद पांडे, महेंद्र श्रीवास्तव, श्रवण रजक, राजू पुनाचा, दानी मिश्रा, राजेंद्र पाल, दिलीप डडसेना, विक्की निषाद, जति जायसवाल, नंद राजपूत, भागवत जायसवाल, मूल सिंह टंडन, सूरज साहू, सुरेश जायसवाल, हुलास डडसेना, संतराम निषाद, मानु कुंभकार सहित नगर एवं क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अंत में विद्वान ज्ञानी ने राम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा मंदिर परिसर जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य महसूस किया और आयोजन की सराहना की।




