छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन को बड़ा झटका: देवजी समेत दो केंद्रीय स्तर के नेताओं ने किया आत्मसमर्पण…
तेलंगाना डीजीपी के समक्ष डाले हथियार, सुरक्षा बलों ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया

जगदलपुर (छ.ग.) / तेलंगाना- छत्तीसगढ़ में सक्रिय माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक झटका लगा है। संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी थिरुपथी उर्फ देवजी उर्फ कुम्मा दादा ने अपने तीन अन्य शीर्ष साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी नेताओं ने तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
देवजी लंबे समय से माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल रहे हैं और कई अहम रणनीतिक निर्णयों में उनकी भूमिका मानी जाती रही है। उनके आत्मसमर्पण को संगठन की केंद्रीय संरचना पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

देवजी के साथ जिन अन्य वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, उनमें केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, स्टेट कमेटी सदस्य बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर तथा स्टेट कमेटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह पहली बार है जब दो केंद्रीय स्तर के नेताओं ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है, जिससे संगठन की रणनीतिक क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
फोर्स प्रेशर और लगातार ऑपरेशनों का असर
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमावर्ती इलाकों में चलाए गए सघन ऑपरेशनों, बढ़ते फोर्स प्रेशर और खुफिया तंत्र की सक्रियता के कारण माओवादी नेटवर्क लगातार कमजोर हुआ है। कई ठिकानों के ध्वस्त होने, सप्लाई चेन बाधित होने और स्थानीय स्तर पर समर्थन घटने से संगठन के भीतर असंतोष भी बढ़ा है।
अधिकारियों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के आत्मसमर्पण से कैडर का मनोबल प्रभावित होगा और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर भी मुख्यधारा में लौटने का दबाव बढ़ेगा। सरकार की पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को दी जा रही सुविधाएं भी इस फैसले का एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही हैं।
नक्सल उन्मूलन अभियान को मिली गति
सुरक्षा बलों ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह घटनाक्रम बताता है कि सरकार की रणनीति, विकास कार्यों की गति और सुरक्षा अभियानों का संयुक्त प्रभाव अब जमीन पर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार संगठन का शीर्ष नेतृत्व कमजोर होता रहा तो आने वाले समय में माओवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी भी सतर्क हैं और शेष सक्रिय कैडर पर निगरानी जारी है।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नेताओं को सरकार की नीति के तहत पुनर्वास पैकेज, सुरक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि यह कदम अन्य भटके हुए युवाओं के लिए भी प्रेरणा का काम करेगा।
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में इस घटनाक्रम को लेकर व्यापक चर्चा है। इसे माओवादी संगठन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।




