सहसपुर लोहारा में ‘मुनगा कुंज’ का शुभारंभ: सुपोषण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नगर पंचायत की सराहनीय पहल,पढ़े पुरा समाचार…
सहसपुर लोहारा | कुपोषण की समस्या को दूर करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पंचायत सहसपुर लोहारा में सोमवार को ‘मुनगा कुंज’ की स्थापना कर मुनगा (सहजन) के पौधों का व्यापक पौधारोपण किया गया। यह पहल महिला एवं बाल विकास विभाग की पोषण योजनाओं तथा नगर पंचायत के पर्यावरण संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम का आयोजन नगर पंचायत सहसपुर लोहारा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर मुनगा के पौधों का रोपण कर ‘मुनगा कुंज’ की आधारशिला रखी गई। कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को पौष्टिक आहार अपनाने, कुपोषण से लड़ने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया।

मुनगा (सहजन) को पोषण का खजाना माना जाता है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, सी एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके नियमित सेवन से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार होता है। इसी कारण महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इसे सुपोषण अभियान से जोड़ते हुए जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर या आसपास मुनगा का एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में न केवल हरित वातावरण विकसित होगा, बल्कि लोगों को प्राकृतिक एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री भी आसानी से उपलब्ध होगी। यह अभियान स्वास्थ्य और पर्यावरण—दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनेगा।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष सरिता संतोष मिश्रा, उपाध्यक्ष डॉ. हेमंत साहु, भाजपा लोहारा मंडल अध्यक्ष लाला राम साहू, सोहन नाथ शिवोपसक, शिवचरण पटेल, नगर पंचायत के पार्षदगण, मुख्य नगर पालिका अधिकारी तेज सिंह चंद्रवंशी, परियोजना अधिकारी रीना ठाकुर सहित नगर पंचायत एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने पौधों की नियमित देखभाल करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प लिया। नगर पंचायत की यह पहल क्षेत्र में ‘सुपोषित परिवार, हरित नगर’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


