चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की आराधना से गूंजे मंदिर, भक्तों में उत्साह,पढ़े पुरा समाचार..?
Third day of Chaitra Navratri: Temples reverberated with the worship of Maa Chandraghanta, enthusiasm among devotees, read the full news..?

छत्तीसगढ़ / भारत – चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का तीसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। क्षेत्र के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां मां के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और शौर्य का प्रतीक माना जाता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा विराजमान होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह रूप शांति और शक्ति का अद्भुत संगम है, जो भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता प्रदान करता है।
पूजा-विधि और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीसरे दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। पूजा में विशेष रूप से दूध, खीर और मिश्री का भोग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां की आराधना से सभी प्रकार के भय और बाधाएं दूर होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
मंदिरों में विशेष आयोजन
स्थानीय मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महिला मंडलों द्वारा गरबा और भक्ति गीतों से माहौल और भी उत्साहपूर्ण बना।
आध्यात्मिक संदेश
मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप हमें जीवन में साहस और संयम बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनके आशीर्वाद से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रशासन की व्यवस्थाएं
नवरात्रि के अवसर पर भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसरों में साफ-सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
निष्कर्ष:
चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां चंद्रघंटा की आराधना से जहां एक ओर आध्यात्मिक शांति मिलती है, वहीं दूसरी ओर जीवन में शक्ति और साहस का संचार होता है। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था का यह पर्व उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।




