CG BREAKING- होली के त्योहार पर जमकर छलके जाम, लगभग 128 करोड़ की शराब पी गए छत्तीसगढ़ के लोग,पढ़े पुरा समाचार….

छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ में होली के त्योहार के दौरान इस बार शराब की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बना दिया। रंगों के इस पर्व पर लोगों ने जमकर जाम छलकाए और प्रदेश में करीब 128 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री दर्ज की गई। आबकारी विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार होली से पहले और त्योहार के बाद शराब दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई, जिसके चलते बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही।

त्योहार से पहले ही बढ़ गई थी मांग

होली के उत्सव को देखते हुए कई दिनों पहले से ही शराब दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी थी। शहरों से लेकर कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक लोगों ने त्योहार की तैयारियों के साथ-साथ शराब की भी जमकर खरीदारी की। बताया जा रहा है कि होली के एक-दो दिन पहले ही दुकानों में स्टॉक तेजी से खत्म होने लगा था, जिसके कारण कई जगह अतिरिक्त आपूर्ति भी करनी पड़ी।

आबकारी विभाग को मिला बड़ा राजस्व

त्योहार के दौरान बढ़ी बिक्री से राज्य सरकार को भी अच्छा राजस्व प्राप्त हुआ है। आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, होली के मौके पर हुई बिक्री से सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त कर मिला है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बताया जा रहा है।

शहरों में सबसे ज्यादा बिक्री

सूत्रों के अनुसार प्रदेश के बड़े शहरों—राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कबीरधाम और अन्य प्रमुख जिलों—में शराब की बिक्री सबसे अधिक दर्ज की गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी होली के जश्न के बीच शराब की मांग बढ़ी रही।

सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम

त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा विशेष निगरानी भी रखी गई। कई स्थानों पर शराब दुकानों के आसपास पुलिस की तैनाती की गई ताकि भीड़ और विवाद की स्थिति से बचा जा सके।

सामाजिक संगठनों ने की संयम की अपील

जहां एक ओर लोग होली के जश्न में डूबे नजर आए, वहीं कई सामाजिक संगठनों ने त्योहार को शांति और संयम के साथ मनाने की अपील भी की। उनका कहना है कि होली प्रेम, भाईचारे और रंगों का पर्व है, इसलिए इसे जिम्मेदारी के साथ मनाया जाना चाहिए।

👉 कुल मिलाकर, इस बार होली के अवसर पर छत्तीसगढ़ में रंगों के साथ जाम भी खूब छलके, जिससे शराब की बिक्री का आंकड़ा 128 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। त्योहार के इस आर्थिक और सामाजिक पहलू ने एक बार फिर प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।

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